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उत्तर प्रदेश: हर्रा-कदरा पेयजल योजना से नाराज ग्रामीणों का प्रदर्शन, पानी की सप्लाई की मांग

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उत्तर प्रदेश  Published by: Indresh Kumar Pandey , Date: 24/08/2026 12:06:16 pm Share:
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  • 24/08/2026 12:06:16 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: जनपद के नव सृजित विकास खंड कोन अंतर्गत जल जीवन मिशन के तहत शुरू की गई हर्रा कदरा ग्राम समूह पेयजल योजना क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए अभिशाप साबित हो रही है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: जनपद के नव सृजित विकास खंड कोन अंतर्गत जल जीवन मिशन के तहत शुरू की गई हर्रा कदरा ग्राम समूह पेयजल योजना क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए अभिशाप साबित हो रही है। फ्लोरोसिस से प्रभावित क्षेत्रों में भी शुद्ध पेयजल उपलब्ध न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने किया जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर पुंगलिया लि. की मनमानी और उदासीनता के कारण सरकारी धन का खुलेआम बंदरबांट किया गया है जिसका जीता जागता उदाहरण लोग आज भी फ्लोराइड युक्त या नदी-नालों का दूषित पानी पीने को विवश है। सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल योजना धरातल पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है। कई ग्राम पंचायतों में नल कनेक्शन का कार्य पूरा नहीं हो सका है, लेकिन संबंधित संस्था के कुछ कारखासों कागजों पर इसे पूर्ण दिखा दिया गया है। ग्रामीणों के बार-बार प्रदर्शन के बाद संस्था ने सच्चाई छिपाने के लिए आनन-फानन में सड़कों के किनारे पाइप ढकने और नल कनेक्शन की मरम्मत का काम शुरू किया था किंतु वह भी धरा रह गया।


 बतादें कि कई जगहों पर डीआई पाइपलाइन, एच डी पी, एमडीपीई पाइपलाइन की गहराई मानक के अनुरूप नहीं है बल्कि पाईप की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाना लाजिमी है। जिसकी वजह से हल्की बरसात या अन्य कारणों से पाइपलाइन आए दिन ध्वस्त हो जाता है । बल्कि संबंधित संस्था द्वारा यह कार्य उच्च स्तरीय जाँच का विषय है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रोजेक्ट लगाने से पहले तैयार होने वाली जीए ड्राइंग के बावजूद नदी की धारा बार-बार क्यों बदल रही है। आधार कार्ड के आधार पर कनेक्शन दिए गए, लेकिन कई वर्षो से नलों से एक बूंद पानी नहीं आ रहा है। संस्था के  कुछ चुनिंदा कर्मचारियों पर संबंधित विभाग व आम जनता को गुमराह करने, तथा कनेक्शन व मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति कर कागजी कोरम पूरा करने का आरोप है।

फ्लोरोसिस प्रभावित कचनरवा, कुड़वा जैसे क्षेत्रों में यह योजना अभिशाप बन गई है। ग्रामीणों के अनुसार, संस्था द्वारा  कई वर्षों से कचनरवा के टोला असनाबांध लिंक रोड वार्ड नंबर 3 में आज तक जलापूर्ति नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने सीएम हेल्प लाइन पर भी शिकायत की, लेकिन संबंधित विभाग ने बिना कार्य पूरा किए ही जाँच आख्या लगा दी, जिससे विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि आज भी सिधवादामर, कुड़वा सहित अन्य स्थानों के लोग नदी-नाले और चुआंड से पानी पीने को मजबूर हैं। सामाजिक कार्यकर्ता गंगा प्रसाद यादव ने संस्था पर हमला बोलते हुए कहा कि नदी नाले के दूषित पानी पीने से जवान बूढ़े दिखने लगे हैं, बच्चों के दांत पीले पड़ रहे हैं, और लोग फ्लोरोसिस की चपेट में आकर काल के मुँह में समा जा रहे हैं। कचनरवा ग्राम पंचायत के असनाबांध वार्ड-3, बड़ाप, मधुरी, नरोइयादामर् , रोहिनवादामर्, बागेसोती, सिंगा, डुबवा, धौरवादामर, सेमरवादामर, गोबरदाहा, डीलवाहा, शिवाखाड़ी, धीचोरवा, बिछमरवा, केवाल, पीपरखाड़ , भालुकूदर्, गीधिया, ललकीदामर, करैइल, रोरवा , नकतवार ,बहुआरा सहित लगभग 32 गांवों में जलापूर्ति वर्षों से ठप है। बतादें कि टंकी से सटा गांव बड़ाप आज तक कनेक्शन से वंचित है।

जिसके क्रम में रविवार को समाजसेवी गंगा प्रसाद यादव की अगुवाई में कुड्वा के टोला पांडुचट्टान  में जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने नियमित पानी आपूर्ति की मांग करते हुए जल निगम और कार्यदायी संस्था के विरुद्ध जमकर नारेबाजी किया।  जिला पंचायत सदस्य छविंद्र नाथ, समाजसेवी गंगा यादव ,  बिहारी प्रसाद यादव ,जयराम,  ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लगभग दो वर्षों से जला पूर्ति नहीं हो पा रही है लोग नदी नाले का पानी पीने को मजबूर हैं और फ़्लोरोसिस की चपेट में आकर अपनी जान तक गवां दे रहे हैं लेकिन गरीबों की आवाज उन संस्था के भ्रष्ट अधिकारियों तक नहीं पहुँच रही है और वहीं संबंधित संस्था ने अपनी पीठ थपथपाने के लिए अधिकांश ग्राम प्रधानों और पंचायत की जल समितियों से झूठे प्रमाण पत्र बनवाकर व  फर्जी वीडियो बनाकर, जल  अर्पण  जैसे कार्यक्रम शासन स्तर पर भेजे और सरकारी धन का बंदरबांट किया गया।

ग्रामीणों ने सूबे के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और भ्रष्ट कार्यदायी संस्था को तत्काल ब्लैक लिस्टेड कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है ताकि सरकार की छवि धूमिल न हो।   मिली जानकारी के अनुसार कार्यदायी संस्था के कुछ चुनिंदा सुपरवाईजर द्वारा कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है यहाँ तक कि कर्मचारियों के उपर मानसिक दबाव बनाकर  श्रम नियमो के विपरीत 9000 रुपए  भुगतान किया जाता है  जबकि कर्मचारियों को  तीन तीन महीनें का  पेमेंट नहीं किया गया। पेमेंट मांगने पर कर्मचारियों का बाहर कर दिया जा रहा है जो न्याय संगत नहीं है। 

इस बावत ए ई ममूर अली (जल निगम) ने कहा  कि अभी लगभग 20 से 25 गाँवों में जलापूर्ति शुरु की गई है और   कुछ जगहों पर पाईप डैमेज होने के कारण समस्या उत्पन्न हुई है, जिसे  जल्द ही बनवा दिया जायेगा।उसके बाद ही लोगों को नियमित पानी मिलने लगेगा। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की यह महत्वाकांक्षी परियोजना, जो जनहित में बड़ी तेजी से शुरू की गई थी, ग्रामीणों तक पानी पहुंचा पाएगी या यह संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर केवल कागजों में सिमट कर रह जाएगी।


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