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महाराष्ट्र: पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की सुरक्षा व रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL हुई दर्ज

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महाराष्ट्र  Published by: Devendr Badrilal Yadav , Date: 04/02/2026 10:42:24 am Share:
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संक्षेप

महाराष्ट्र: आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व आईपीएस श्री अमिताभ ठाकुर की जनहित याचिका (PIL) माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा औपचारिक रूप से दर्ज किया गया।

विस्तार

महाराष्ट्र: आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व आईपीएस श्री अमिताभ ठाकुर की जनहित याचिका (PIL) माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा औपचारिक रूप से दर्ज किया गया। आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री देवेन्द्र सिंह राणा द्वारा दिनांक 22 दिसंबर 2025 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई जनहित याचिका (Inward No. 11251/SCI/PIL(E)/2026) को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया गया है। यह जनहित याचिका पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमिताभ ठाकुर से संबंधित गंभीर संवैधानिक और मानवाधिकार उल्लंघनों पर आधारित है, जिनमें प्रमुख रूप से निम्न विषय शामिल हैं। कोडीन युक्त कफ सिरप माफिया एवं उससे जुड़े राजनीतिक संरक्षण के खुलासों के कारण जान का गंभीर खतरा। याचिका में माननीय सर्वोच्च न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप, श्री अमिताभ ठाकुर की बिना शर्त रिहाई, CBI/SIT स्तर पर स्वतंत्र जांच (न्यायिक पर्यवेक्षण में), जान-माल की पूर्ण सुरक्षा, जेल में अनावश्यक निगरानी की समाप्ति तथा दोषी अधिकारियों एवं माफिया तत्वों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका की प्राप्ति की सूचना याचिकाकर्ता को ईमेल एवं एसएमएस के माध्यम से प्राप्त हुई है। याचिका का वर्तमान स्टेटस “UNDER PROCESS” है।

 

यह याचिका Letter Date 24-12-2025 के साथ दर्ज की गई है, जिसे 03-02-2026 को औपचारिक रूप से रिसीव किया गया है। यह जनहित याचिका भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 21 एवं 22 के घोर उल्लंघन, व्हिसलब्लोअर संरक्षण तथा लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज़ाद अधिकार सेना यह स्पष्ट करती है कि वह श्री अमिताभ ठाकुर जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अन्याय के विरुद्ध यह संघर्ष निरंतर जारी रखेगी। हम जनता, मीडिया, राजनीतिक दलों एवं मानवाधिकार संगठनों से अपील करते हैं कि वे इस प्रकरण पर सतर्क दृष्टि बनाए रखें और न्याय की इस लड़ाई में अपना सक्रिय समर्थन दें।