-
☰
हरियाणा: सर्वधर्म बुद्ध पूर्णिमा सभा, विभिन्न धर्मों ने दिया शांति और एकता का संदेश
- Photo by : social media
संक्षेप
हरियाणा: कल डॉ. भीमराव अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी, जयपुर के प्रांगण में बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक भव्य सर्वधर्म सभा का आयोजन किया गया।
विस्तार
हरियाणा: कल डॉ. भीमराव अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी, जयपुर के प्रांगण में बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक भव्य सर्वधर्म सभा का आयोजन किया गया। यह आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी और प्रज्ञा ज्ञान चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। प्रज्ञा ज्ञान चैरिटेबल ट्रस्ट का भी इस आयोजन में विशेष सहयोग रहा। वेलफेयर सोसाइटी का विशेष आभार मैं खासकर डॉ. भीमराव अंबेडकर वेलफेयर सोसाइटी को धन्यवाद देता हूँ कि वे आए दिन हमारे महापुरुषों के जन्म दिवसों पर ऐसी सभाएँ आयोजित करते आ रहे हैं। यह समाज के लिए बहुत ही अच्छा संदेश है और इससे समाज को महापुरुषों के जीवन व विचारों के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है। ऐसे आयोजन बहुजन समाज को जागृत करने का कार्य कर रहे हैं। सभा में पधारे सभी धर्मों के धर्मगुरु इस आयोजन में सभी धर्मों के धर्मगुरुओं को आमंत्रित किया गया था और सभी पधारे: 1. जैन धर्म सर्व धर्म महासभा के अध्यक्ष श्रीमान प्रकाश चंद जैन पधारे। उन्होंने भगवान बुद्ध के उपदेशों पर अपना विशिष्ट संदेश दिया। उन्होंने प्रारंभ में कुछ मनुवादी शब्द बोले, लेकिन बाद में सुधार कर बुद्ध के उपदेशों पर ही प्रवचन दिया। बौद्ध धर्म का अंतिम उद्बोधन अंत में बौद्ध धर्म के प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि भगवान बुद्ध कभी भी ईश्वर की उपस्थिति और आत्मा-परमात्मा में कोई विश्वास नहीं रखते थे। उन्होंने इसका खंडन किया था। बुद्ध ने कहा था, जिसको देखा ही नहीं, एहसास ही नहीं किया, उसको क्यों मानें? मेरे जन्म में भगवान का कोई हाथ नहीं है। मेरा जन्म मेरे माता-पिता ने दिया, माता-पिता ने बड़ा किया। तो भगवान का इसमें कहाँ हाथ था? भगवान का कहाँ हाथ है? तथागत बुद्ध और सम्राट अशोक की विरासत बुद्ध ने अंधविश्वास, पाखंडवाद और काल्पनिक देवी-देवताओं को नकारकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिया। सम्राट अशोक ने बुद्ध की दीक्षा लेकर अहिंसा का मार्ग अपनाया और बुद्ध पूर्णिमा को बड़े ही उत्साह से मनाने का संकल्प लिया था। आज 146 देश बुद्ध को मानते हैं। *बहुजन एकता का संकल्प* सभा में राजस्थान के SC, ST, OBC और माइनॉरिटी संगठनों ने भाग लिया। 1 मई मजदूर दिवस भी है। आने वाले समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें बुद्ध और बाबा साहब के बताए मार्ग पर एकजुट होकर चलना होगा। हम भारत के मूल निवासी हैं, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा हमारा सबसे बड़ा उत्सव है। जो साथी कल की सभा में नहीं आ पाए, उनसे निवेदन है कि आगे होने वाले कार्यक्रमों में जरूर शामिल हों।
2. ईसाई धर्म ईसाई धर्म के पोप भी पधारे और उन्होंने भगवान बुद्ध के बारे में अपने वक्तव्य दिए।
3. सिख धर्म सिख धर्म के गुरु भी सभा में पधारे और बुद्ध के शांति संदेश पर अपने विचार रखे।
4. इस्लाम धर्म माइनॉरिटी मुस्लिम समाज के धर्मगुरु अख्तर साहब पधारे। उन्होंने भगवान बुद्ध की प्रशंसा करते हुए विश्व में उनके प्रचार-प्रसार और उनके संदेश के बारे में बताया।
5. गलता पीठ गलता पीठ के गुरु भी पधारे। उनके स्वागत के समय उनके चेले ने उनकी कुर्सी पर पहले अपना आसन लगाया, जिससे मनुवाद की झलक महसूस हुई।
राजस्थान: शैक्षिक संगोष्ठी में नवाचार, योजनाओं और पर्यावरण संरक्षण पर मंथन
उत्तर प्रदेश: IPL सट्टेबाजी गिरोह का हुआ पर्दाफाश, 7 आरोपी गिरफ्तार, लाखों की नकदी बरामद
झारखण्ड: जनप्रतिनिधि की पहल से गंभीर मरीज को मिला बेहतर इलाज, स्थिति में हुआ सुधार
हरियाणा: भगवान परशुराम द्वार का लोकार्पण, डॉ. अरविंद शर्मा ने की 21 लाख की घोषणा