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मध्य प्रदेश: पत्रकार हमला प्रकरण में चार नामजद आरोपी जेल भेजे गए, न्यायालय में पेशी के बाद हुई कार्रवाई
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: धामनोद धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र में पत्रकार सोनू मीणा पर कथित हमले से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुलिस ने चार नामजद आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया।
विस्तार
मध्य प्रदेश: धामनोद धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र में पत्रकार सोनू मीणा पर कथित हमले से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुलिस ने चार नामजद आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया। न्यायालय की प्रक्रिया के बाद चारों आरोपियों को जेल भेज दिया गया। कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर धामनोद से लेकर महेश्वर क्षेत्र तक चर्चा में है। जानकारी के अनुसार धामनोद थाना क्षेत्र के ग्राम चिकित्स्यावड़ स्थित प्लास चौराहे के समीप नायक ढाबे पर बुलेट न्यूज़ के पत्रकार सोनू मीणा के साथ कथित हमले का मामला सामने आया था। इस संबंध में धामनोद थाने में अपराध क्रमांक 0333/2026, दिनांक 16 जुलाई 2026 को प्रकरण दर्ज किया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मामले में महेश्वर क्षेत्र निवासी रोहित पिता लक्ष्मीनारायण सोलंकी, रोशन पिता प्रेमचंद केवट, कपिल पिता जितेंद्र पटेल और लोकेश रामचन्द्र गुर्जर को नामजद आरोपी बनाया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों द्वारा पत्रकार पर वाहन चढ़ाने का प्रयास करते हुए जानलेवा हमला किया गया। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगी। प्रकरण दर्ज होने के बाद शुरुआती कार्रवाई और धाराओं को लेकर भी चर्चा सामने आई थी। शिकायत पक्ष की ओर से हत्या के प्रयास से संबंधित धारा शामिल नहीं किए जाने पर आपत्ति जताए जाने की बात कही गई। बाद में पुलिस द्वारा मामले में अतिरिक्त धाराएं जोड़े जाने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ी। अब चारों नामजद आरोपियों को न्यायालय में पेश किए जाने और वहां से जेल भेजे जाने के बाद मामले ने नया मोड़ लिया है। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चाएं तेज हैं। लोगों की नजर अब मामले की आगामी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर बनी हुई है।वहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि प्रकरण को लेकर महेश्वर विधायक राजकुमार मेव की उपस्थिति धामनोद थाने में देखी गई थी। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पक्ष की पुष्टि अलग से नहीं हो सकी है। फरियादी पक्ष की ओर से इंदौर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता प्रदीप दुबे द्वारा कानूनी सहयोग दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। फिलहाल चार आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद पुलिस की आगामी जांच और न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजर है। मामले में आगे की स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी।
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