Contact for Advertisement 9919916171


राजस्थान: सुविधाओं से वंचित समाजसेवी पत्रकारों के समर्थन में उठी आवाज़

- Photo by : social media

राजस्थान  Published by: Jaibeer Singh , Date: 12/02/2026 10:41:21 am Share:
  • राजस्थान
  • Published by: Jaibeer Singh ,
  • Date:
  • 12/02/2026 10:41:21 am
Share:

संक्षेप

राजस्थान: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाली पत्रकारिता आज खुद न्याय की आस में खड़ी दिखाई दे रही है।

विस्तार

राजस्थान: लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाली पत्रकारिता आज खुद न्याय की आस में खड़ी दिखाई दे रही है। दिन-रात मेहनत कर समाज की आवाज़ उठाने वाले समाजसेवी पत्रकारों के साथ सरकार का रवैया बेहद निराशाजनक है। सरकारें बड़े-बड़े बजट पेश करती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि जनहित में काम करने वाले पत्रकार आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, जो पत्रकार सत्ता से सवाल पूछते हैं, गांवों की समस्याओं को उजागर करते हैं, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं—उन्हें न तो कोई आर्थिक सुरक्षा मिलती है और न ही उनके परिवारों के भविष्य की चिंता की जाती है। न टोल टैक्स में छूट, न बच्चों की शिक्षा में राहत, न स्वास्थ्य बीमा जैसी कोई ठोस सुविधा। ग्रामीण इलाकों की स्थिति और भी चिंताजनक है। आज भी कई गांवों में न ढंग के विद्यालय हैं, न पक्की सड़कें, न शुद्ध पेयजल और न ही नियमित बिजली।

 

ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार के बजट का असली लाभ आखिर किसे मिल रहा है? राजस्थान सरकार सहित सभी सरकारों को चाहिए कि वे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के साथ-साथ समाजसेवी पत्रकारों की ओर भी गंभीरता से ध्यान दें। केवल सत्ता से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने वालों को सुविधाएँ देना और जमीनी पत्रकारों को अनदेखा करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। अब समय आ गया है कि सरकार पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि जनसेवा मानने वाले पत्रकारों के हित में ठोस नीतियाँ बनाए। सवाल साफ़ है—जो पत्रकार समाज के लिए दिन-रात खड़ा रहता है, उसके लिए सरकार कब खड़ी होगी?