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छत्तीसगढ़: फ्लाई ऐश डंपिंग से बढ़ा प्रदूषण, कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की दी गई चेतावनी
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संक्षेप
छत्तीसगढ़: पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोनकोना के आश्रित ग्राम घोघरा में चल रहा राखड़ (फ्लाई ऐश) पटिंग कार्य अब ग्रामीणों के लिए गंभीर मुसीबत बनता जा रहा है।
विस्तार
छत्तीसगढ़: पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोनकोना के आश्रित ग्राम घोघरा में चल रहा राखड़ (फ्लाई ऐश) पटिंग कार्य अब ग्रामीणों के लिए गंभीर मुसीबत बनता जा रहा है। गांववासियों ने आरोप लगाया है कि विवेक कंस्ट्रक्शन द्वारा बालको से लाई जा रही राखड़ को पूर्व की बंद पड़ी गिट्टी खदान में नियमों की अनदेखी करते हुए डंप और फैलाया जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि डंप की गई राखड़ पर पानी का छिड़काव तक नहीं किया जा रहा है। इसका असर हाल के दिनों में आए तेज आंधी-तूफान और मौसम खराब होने के दौरान साफ देखने को मिला, जब राखड़ उड़कर सीधे लोगों के घरों तक पहुंच गई। गांववासियों के अनुसार हल्की हवा चलते ही घरों के भीतर राख की परत जम जाती है। यहां तक कि खाने-पीने की वस्तुओं में भी राख पहुंच रही है और लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक राखड़ की महीन धूल से बच्चों और बुजुर्गों में खांसी, आंखों में जलन और सांस संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। लोग दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने को मजबूर हैं, बावजूद इसके राखड़ घरों के अंदर तक पहुंच रही है। इससे गांव का सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार द्वारा बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन किए मनमाने तरीके से राखड़ पटिंग कराई जा रही है। न तो नियमित पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही धूल नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था की गई है। ग्रामीणों ने बताया कि जिस स्थान पर राखड़ डंप की जा रही है, उसके समीप निजी कृषि भूमि और तान नदी स्थित है। ऐसे में राखड़ खेतों और नदी तक पहुंच रही है, जिससे खेती और पर्यावरण दोनों पर खतरा मंडराने लगा है। किसानों और आदिवासी परिवारों में इसे लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। गांववासियों का आरोप है कि मामले की शिकायत कई बार जनदर्शन और वर्तमान समाधान शिविर में की जा चुकी है। इसके अलावा पूर्व में पोड़ी-उपरोड़ा एसडीएम से भी शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। शिकायतकर्ता ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर संबंधित विभाग ठेकेदार को खुला संरक्षण दे रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही फ्लाई ऐश प्रबंधन के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि गांववासियों को इस समस्या से राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।
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