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दिल्ली: औषधीय खेती से किसानों को मिला नया अवसर
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संक्षेप
दिल्ली: भारत में प्राकृतिक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से औषधीय खेती मेडिसिनल फार्मिंग तेजी से एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही है।
विस्तार
दिल्ली: भारत में प्राकृतिक और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से औषधीय खेती मेडिसिनल फार्मिंग तेजी से एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह खेती स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय तीनों दृष्टियों से लाभकारी साबित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि औषधीय पौधों की खेती से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले प्राकृतिक उत्पादों का उत्पादन संभव हो रहा है। साथ ही रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के सीमित उपयोग के कारण मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है तथा जल और वायु प्रदूषण में भी कमी आती है। बाजार में आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते औषधीय फसलों की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का नया स्रोत बनती जा रही है। कई राज्यों में किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ तुलसी, अश्वगंधा, एलोवेरा और अन्य औषधीय पौधों की खेती अपनाने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। प्राकृतिक खेती को भविष्य की सुरक्षित और टिकाऊ कृषि प्रणाली बताते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को औषधीय खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
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