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मध्य प्रदेश: जर्जर पुलिया बनी ग्रामीणों की परेशानी, मरम्मत न होने पर आंदोलन की दी चेतावनी
- Photo by : social media
संक्षेप
मध्य प्रदेश: नगर विकास के नाम पर भले ही नगर परिषद द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: नगर विकास के नाम पर भले ही नगर परिषद द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। नगर परिषद ब्योहारी के वार्ड क्रमांक 9 स्थित आदर्श ग्राम न्यू बरौंधा जाने वाले एकमात्र संपर्क मार्ग की पुलिया एवं सडक़ लंबे समय से जर्जर और क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ी है। इससे वार्डवासियों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड वासियो का कहना है कि जुलाई 2025 में हुई भारी वर्षा के दौरान पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी। घटना के लगभग एक वर्ष बाद भी पुलिया का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। समस्या की गंभीरता को देखते हुए वार्डवासियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर तत्काल मरम्मत एवं नवीन पुल निर्माण की मांग की है। वर्षा में फिर बह सकती है पुलिया, हो गया है खोखला वार्ड वासियों के अनुसार जुलाई 2025 की बारिश के बाद पुलिया के नीचे का हिस्सा पूरी तरह खोखला हो गया था। सुरक्षा रेलिंग का अभय होने से दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है। वार्डवासियों एवं क्षेत्रीय पार्षद धर्मेन्द्र सिंह द्वारा कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत एवं ज्ञापन सौपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। एक माह में कार्रवाई नहीं हुई तो होगा जनांदोलन धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि तेज बारिश के दौरान पुलिया और उससे जुड़ी सड़क का बड़ा हिस्सा बह गया वा जिससे मुख्य मार्ग पर विशाल गड्ढा बन गया और गांव का संपर्क बाधित हो गया। हालत से मजबूर होकर ग्रामीणों ने स्वयं लाखों रुपये खर्च कर नहीं और मिट्टी डालकर अस्थायी मार्ग तैयार किया, लेकिन आगामी चारिश में इसके फिर यह जाने की आशंका बनी हुई है। पार्ड गासियों ने प्रशासन से भास्त पुलिया एवं सहत का तत्काल निर्माण, राडक किनारे मजबूत धिचिग कार्य, नदीन एवं ऊचे पुल का निर्माण, जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की जांच तथा निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए स्थानीय समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर उनकी मागों पर कार्रवाई नहीं की नई तो वे सामूहिक धरना-प्रदर्शन एवं जन आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सम्पर्ण जिम्मेदारी शालन-प्रशासन की होगा।
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