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मध्य प्रदेश: सती माता-जुंजार मालदेव मंदिर में ध्वजारोहण, वार्षिकोत्सव संपन्न

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मध्य प्रदेश  Published by: Ashoke Bhandari , Date: 19/05/2026 05:03:24 pm Share:
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: भीनमाल स्थानीय महावीर चौराहा स्थित राजपूत सोलंकी परिवार के कुलदेवता जुंजार मालदेव एवं सती माता मंदिर का दसवां वार्षिकोत्सव पारंपरिक श्रद्धा, हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।

विस्तार

मध्य प्रदेश: भीनमाल स्थानीय महावीर चौराहा स्थित राजपूत सोलंकी परिवार के कुलदेवता जुंजार मालदेव एवं सती माता मंदिर का दसवां वार्षिकोत्सव पारंपरिक श्रद्धा, हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इस गौरवशाली अवसर पर सोलंकी राजपूत परिवार द्वारा भव्य ध्वजारोहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें संपूर्ण क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।


वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिखर पर लहराई ध्वजा

उत्सव की शुरुआत अलसुबह विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद पंडित नरोत्तमलाल के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोचार के बीच अभिजीत मुहूर्त में मंदिर के शिखर पर गाजे-बाजे के साथ नवीन ध्वजा चढ़ाई गई। महाआरती के दौरान पूरा परिसर "जय जुंजार बावजी", "जय सती माता" के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। सुबह से ही मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।समारोह के दौरान इतिहासकार हरीसिंह सोलंकी ने गढ़मगा रावों की बही और ऐतिहासिक साक्ष्यों के हवाले से जुंजार मालदेव सोलंकी के अदम्य साहस और शौर्य की गौरव गाथा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह घटना ईस्वी सन 1545 की है। उस समय सिरोही के महाराजा रायसिंह ने भीनमाल को अपने अधीन करने के लिए एक विशाल फौज के साथ नगर को चारों तरफ से घेर लिया था । भीनमाल गढ़ की रक्षा के लिए मालदेव सोलंकी ने वीरतापूर्वक मोर्चा संभाला। उन्होंने घोड़े पर सवार होकर हमलावरों से घमासान युद्ध किया और मातृभूमि की रक्षार्थ अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। इस युद्ध में मालदेव सोलंकी के बाण से सिरोही के महाराजा गंभीर रूप से घायल होकर मूर्छित हो गए, जिससे उनकी सेना में भगदड़ मच गई और फौज को वापस लौटना पड़ा। मालदेव सोलंकी के बलिदान के बाद उनकी ठकुरानियां माणककंवर राठौड़ एवं जसकंवर चौहान सती हो गईं। इस शौर्य गाथा को सुन उपस्थित जनसमूह भावुक हो उठा।

सर्वसमाज की रही अनुकरणीय उपस्थिति

इस धार्मिक व ऐतिहासिक उत्सव में कौमी एकता और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल देखने को मिली। कार्यक्रम में सोलंकी परिवार के साथ-साथ सर्वसमाज के गणमान्य नागरिकों ने उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर ठाकुर जबरसिंह सोलंकी (लेदरमेर), हरिसिंह, जीवसिंह, सुरमसिंह, पेपसिंह, कालूसिंह, ईश्वर सिंह, छैलसिंह, विजय सिंह, नरेन्द्र सिंह, डूंगरसिंह, महेंद्र सिंह, दिलवरसिंह, रामसिंह, जनकसिंह, रेवतसिंह, कुलदीप सिंह, राजपाल सिंह,रमेश माली, आसाराम माली, मुकेश महेश्वरी, जबराराम सुथार, गोविंद शर्मा,अबु खां, बगदे खाँ, सूजे खाँ मीरासी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  दिनभर चले इस उत्सव में महाप्रसाद का भी आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। मंदिर कमेटी और सोलंकी परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।