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मध्य प्रदेश: 700 से अधिक संत-महंतों की मौजूदगी में कमल दास महाराज को मिली ‘महंत श्री’ की उपाधि

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh , Date: 11/09/2026 01:40:21 pm Share:
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  • 11/09/2026 01:40:21 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: संत उत्थान समिति सती बैकुंठ धाम सरसैनी की एक महत्वपूर्ण बैठक हनुमानगढ़ पूढ़ा, ग्राम पंचायत सेथरा बड़ई स्थित मंदिर परिसर में आयोजित की गई।

विस्तार

मध्य प्रदेश: संत उत्थान समिति सती बैकुंठ धाम सरसैनी की एक महत्वपूर्ण बैठक हनुमानगढ़ पूढ़ा, ग्राम पंचायत सेथरा बड़ई स्थित मंदिर परिसर में आयोजित की गई। बैठक में जिलेभर से 700 से अधिक संत, महंत, महामंडलेश्वर एवं धर्माचार्य शामिल हुए। इस अवसर पर हनुमानगढ़ मंदिर के महंत कमल दास महाराज को संत समाज की उपस्थिति में विधिवत रूप से ‘महंत श्री’ की उपाधि से विभूषित किया गया। उपाधि मिलने के बाद अब वे महंत श्री कमल दास महाराज के नाम से जाने जाएंगे। कार्यक्रम में संत समाज के अनेक प्रमुख संत-महंतों ने उपस्थित होकर नवविभूषित महंत श्री कमल दास महाराज को शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद प्रदान किया। आयोजन स्थल पर संतों की बड़ी संख्या में उपस्थिति से धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।


संत समाज के प्रमुख पदाधिकारी रहे मौजूद

बैठक में  मंदिर के महामंडलेश्वर महंत राम लखन दास गुरु महाराज,,संत उत्थान समिति सती बैकुंठ धाम सरसैनी के अध्यक्ष महामंडलेश्वर महंत बालक दास महाराज, वानखंडेश्वर महादेव मंदिर कैलारस, समिति के मंत्री महंत श्री दास महाराज, महामंडलेश्वर महंत ऋषि महाराज गुफा आश्रम महासुख का पुरा, महामंडलेश्वर महंत श्री बालक दास महाराज  लालजी का पुरा, महामंडलेश्वर महंत नारायण दास महाराज, महंत रामकिशोर दास शास्त्री गिर्राज जी मंदिर पोरसा, तथा महंत भरत दास महाराज, छोटी जग्गा पोरसा सहित बड़ी संख्या में संत-महंत एवं महामंडलेश्वर महंत मौजूद रहे। संत समाज के वरिष्ठ संतों की उपस्थिति में कमल दास महाराज को ‘महंत श्री’ की उपाधि प्रदान किए जाने को संत समाज के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना गया।

सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को लेकर बने प्रस्ताव

बैठक के दौरान संत उत्थान समिति द्वारा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और धार्मिक संस्कारों को समाज की नई पीढ़ी तक पहुंचाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। संतों ने कहा कि सनातन धर्म की मूल शिक्षाओं—धर्म, संस्कार, सेवा, सदाचार, करुणा और मानव कल्याण—को जन-जन तक पहुंचाने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। बैठक में धार्मिक आयोजनों, संत समाज की सक्रिय भूमिका, युवाओं को भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं से जोड़ने तथा धार्मिक एवं सामाजिक चेतना बढ़ाने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। संतों ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, धार्मिक ग्रंथों, संस्कारों और सनातन परंपराओं की जानकारी दी जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़ी रहें।

गौ संरक्षण को लेकर भी उठी आवाज

बैठक में गौ माता की वर्तमान स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। संतों ने कहा कि सड़कों पर बड़ी संख्या में गौवंश के घूमने से जहां स्वयं गौवंश के जीवन पर संकट बना रहता है, वहीं सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ती है। संत समाज ने शासन एवं प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में गौशालाओं की व्यवस्था एवं संचालन सुनिश्चित किया जाए तथा सड़कों पर घूम रहे गौवंश को सुरक्षित रूप से गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। गौ संरक्षण को धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एवं मानवीय जिम्मेदारी बताते हुए संतों ने इस दिशा में समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयास की आवश्यकता जताई।

धर्म के साथ समाज सेवा का भी संकल्प

बैठक में संतों ने कहा कि सनातन धर्म केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, परोपकार, जीवों के प्रति दया, गौ संरक्षण और मानव कल्याण भी इसकी महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। संत समाज ने धार्मिक चेतना के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया। संत उत्थान समिति की बैठक में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक विषयों पर प्रस्ताव पारित किए गए तथा भविष्य में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार, संत समाज की एकजुटता और गौ संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने पर सहमति बनी। कार्यक्रम के अंत में संत समाज एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने महंत श्री कमल दास महाराज को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। 700 से अधिक संत-महंतों की मौजूदगी में आयोजित यह धार्मिक बैठक क्षेत्र में संत समाज की एकजुटता और सनातन धर्म के प्रति जागरूकता का महत्वपूर्ण संदेश देकर संपन्न हुई।