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राजस्थान: हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान और उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग की बड़ी तैयारी

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राजस्थान  Published by: Pramod Kumar Bansal , Date: 17/07/2026 05:49:38 pm Share:
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  • 17/07/2026 05:49:38 pm
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राजस्थान: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के निर्देशों के तहत कोटपूतली-बहरोड़ जिले में उच्च जोखिम (हाई रिस्क) वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्राप्त दिशा-निर्देशों के बाद 17 जुलाई को ब्लॉक कोटपूतली में सभी चिकित्सा अधिकारियों, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की विशेष बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों का उद्देश्य हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान, ट्रैकिंग और समय पर उपचार सुनिश्चित करना रहा। ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी (बीसीएमओ) डॉ. धर्मेंद्र ने सभी चिकित्सा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की। इसके बाद आयोजित सेक्टर बैठक में एएनएम और आशा सहयोगिनियों को हाई रिस्क गर्भावस्था की विभिन्न श्रेणियों, पहचान की प्रक्रिया और समय पर रेफरल से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक सेक्टर बैठक में निर्धारित बिंदुओं की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि किसी भी हाई रिस्क गर्भवती महिला की पहचान छूटने न पाए।

इसी क्रम में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नागाजी की गौर में जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी (आरसीएचओ) डॉ. अरविंद अग्रवाल की अध्यक्षता में शहरी क्षेत्र की एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में हाई रिस्क एएनसी (एंटीनाटल केयर) से जुड़े सभी पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. अग्रवाल ने स्वास्थ्य कर्मियों को बताया कि जमीनी स्तर पर नियमित निगरानी और समय पर पहचान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बैठकों के दौरान सभी एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं से आरसीएच रजिस्टर, आशा डायरी, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) रजिस्टर तथा फॉर्म संख्या 6, 7 और 8 की जांच कराई गई। दस्तावेजों के आधार पर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की एक विस्तृत सूची तैयार की गई, ताकि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन तैयारियों का मुख्य उद्देश्य 18 जुलाई को आयोजित होने वाले **प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA)** को सफल बनाना है। इस विशेष स्वास्थ्य शिविर के दौरान सभी गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की जाएगी, जबकि चिन्हित हाई रिस्क महिलाओं का विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में संस्थागत उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। विभाग ने बताया कि अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए राज्य और जिला स्तर की टीमें भी विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगी, ताकि सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो सकें।