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छत्तीसगढ़: ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का भव्य आयोजन, सांस्कृतिक आस्था और इतिहास की गूंज
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संक्षेप
छत्तीसगढ़: सूरजपुर भारतीय संस्कृति, आस्था एवं श्रद्धा के अमर प्रतीक सोमनाथ मंदिर की गौरवशाली गाथा पर आधारित ऐतिहासिक कार्यक्रम "सोमनाथ स्वाभिमान पर्व-अटूट आस्था के 1000 वर्ष" का भव्य आयोजन आज सूरजपुर जिले के पावन कुदरगढ़ धाम में संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन सूरजपुर के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।
विस्तार
छत्तीसगढ़: सूरजपुर भारतीय संस्कृति, आस्था एवं श्रद्धा के अमर प्रतीक सोमनाथ मंदिर की गौरवशाली गाथा पर आधारित ऐतिहासिक कार्यक्रम "सोमनाथ स्वाभिमान पर्व-अटूट आस्था के 1000 वर्ष" का भव्य आयोजन आज सूरजपुर जिले के पावन कुदरगढ़ धाम में संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन सूरजपुर के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। यह गरिमामय कार्यक्रम माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की वर्चुअल उपस्थिति में आयोजित हुआ, जिसने आयोजन को विशेष ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर आधारित विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, उद्बोधनों एवं विचारों के माध्यम से भारतीय सभ्यता की अटूट आस्था एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सजीव स्मरण किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में रेखांकित किया कि सोमनाथ मंदिर केवल एक तीर्थस्थल मात्र नहीं, अपितु भारतीय संस्कृति, आत्मगौरव एवं राष्ट्रीय चेतना का अमिट प्रतीक है, जिसने सदियों के अनवरत संघर्ष, आक्रमणों एवं पुनर्निर्माण के पश्चात भी अपनी मूल पहचान एवं अखंड आस्था को अक्षुण्ण बनाए रखा है तथा भारतीय जनमानस के स्वाभिमान का सजीव प्रतीक बना हुआ है। कार्यक्रम में यह भी विशेष रूप से उल्लेखित किया गया कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व ऐतिहासिक दृष्टि से दो महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है—प्रथम, वर्ष 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए प्रथम विदेशी आक्रमण के एक हजार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर, तथा द्वितीय, स्वतंत्रता पश्चात वर्ष 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के पुनः उद्घाटन के 75 वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर। यह पर्व भारतीय जनमानस के अदम्य साहस, अटूट संकल्प एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण की गौरवशाली यात्रा का जीवंत साक्षी है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि सोमनाथ की गौरवगाथा भारतीय समाज की अटूट श्रद्धा, अदम्य धैर्य एवं अप्रतिम संघर्षशीलता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व समाज में सांस्कृतिक जागरूकता एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान को सुदृढ़ करने का अमूल्य संदेश देता है तथा भावी पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के प्रति गौरवबोध से जोड़ता है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारतीय संस्कृति सदैव से विश्व को शांति, आध्यात्म एवं मानवता का कल्याणकारी संदेश देती रही है तथा सोमनाथ मंदिर इस सनातन परंपरा का श्रेष्ठतम उदाहरण है। कार्यक्रम में श्रीमती कुसुम सिंह, श्रीमती इन्द्रमणी पैकरा, श्रीमती सुधा तिवारी, श्री गुलाब सिंह, श्रीमती अनीता पैकरा, श्री रघुवंश सोनी, श्रीमती अनीता सोनवानी, श्री बलराम सोनी, सरपंच श्री रामेश्वर चेरवा, श्रीमती विमीषा यादव, श्री श्यामलाल गुज्जर, श्री केशव प्रसाद सिंह, श्रीमती संधानी यादव, श्री नरेश जायसवाल, श्री संतोष सिंह, श्रीमती गौरी सिंह, श्री संजय राजवाड़े, श्रीमती सत्या दुबे, श्रीमती प्रतीमा साहू सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री प्रशांत कुमार ठाकुर, डीएफओ श्री डी.पी. साहू, जिला पंचायत सीईओ श्री विजेंद्र सिंह पाटले, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्रीमती चांदनी कंवर सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारीगण एवं भारी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। आयोजन ने धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से एक अविस्मरणीय छाप छोड़ी तथा उपस्थित श्रद्धालुओं ने सोमनाथ की गौरवगाथा का स्मरण कर भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी आस्था एवं समर्पण को पुनः अभिव्यक्त किया।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा राजवाड़े ने अपने उद्बोधन में कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि हमारी सनातन सभ्यता, संस्कृति एवं अटूट आस्था की अमर पहचान है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी गौरवशाली संस्कृति, समृद्ध इतिहास एवं उज्ज्वल परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा उन्हें अपनी जड़ों के प्रति सजग एवं समर्पित बनाते हैं। कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने अपने उद्बोधन में कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की सांस्कृतिक चेतना एवं आध्यात्मिक आस्था का जीवंत एवं प्रेरणादायी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व नई पीढ़ी को हमारी गौरवशाली परंपराओं, उत्कृष्ट सांस्कृतिक मूल्यों एवं अखंड राष्ट्रीय एकता के सूत्र से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी संस्कृति एवं विरासत का संरक्षण-संवर्धन हम सभी की सामूहिक एवं नैतिक जिम्मेदारी है। कलेक्टर श्रीमती जमील ने आगे कहा कि कुदरगढ़ धाम जैसे पावन एवं ऐतिहासिक स्थल पर इस गरिमामय आयोजन का सम्पन्न होना सूरजपुर जिले के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।
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