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मध्य प्रदेश: समाप्त लीज़ भूमि को फ्रीहोल्ड करने की मांग, 10 सूत्रीय नीति प्रस्ताव पेश

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मध्य प्रदेश:  Published by: Kamal Patni , Date: 17/03/2026 10:23:37 am Share:
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  • 17/03/2026 10:23:37 am
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संक्षेप

मध्य प्रदेश:  अनेक शहरों और कस्बों में बड़ी संख्या में ऐसी भूमि मौजूद है जो दशकों पहले दीर्घकालीन लीज़, प्रायः 99 वर्ष की अवधि के लिए, व्यक्तियों, संस्थाओं या विभिन्न प्रयोजनों के लिए प्रदान की गई थी। उस समय इस व्यवस्था का उद्देश्य विकास को बढ़ावा देना तथा भूमि के नियंत्रित उपयोग को सुनिश्चित करना था।

विस्तार

मध्य प्रदेश:  अनेक शहरों और कस्बों में बड़ी संख्या में ऐसी भूमि मौजूद है जो दशकों पहले दीर्घकालीन लीज़, प्रायः 99 वर्ष की अवधि के लिए, व्यक्तियों, संस्थाओं या विभिन्न प्रयोजनों के लिए प्रदान की गई थी। उस समय इस व्यवस्था का उद्देश्य विकास को बढ़ावा देना तथा भूमि के नियंत्रित उपयोग को सुनिश्चित करना था। समय बीतने के साथ इन लीज़ों की अवधि कई स्थानों पर समाप्त हो चुकी है या समाप्ति के निकट है, लेकिन इन भूमि की वर्तमान कानूनी स्थिति अनेक मामलों में स्पष्ट नहीं है। यही कारण है कि कई शहरों में हजारों भूखंडों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। भूमि प्रशासन की व्यवस्था मुख्यतः Madhya Pradesh Land Revenue Code, 1959 के अंतर्गत संचालित होती है तथा शहरी नजूल भूमि से जुड़े मामलों में Madhya Pradesh Nazul Rules लागू होते हैं। इसके बावजूद व्यवहार में यह देखा जा रहा है कि लीज़ अवधि समाप्त होने के बाद भी भूमि की स्थिति को लेकर एक समान और स्पष्ट नीति का अभाव है।

लीज़ व्यवस्था से उत्पन्न समस्याएँ लीज़ का मूल उद्देश्य भूमि का स्वामित्व देना नहीं बल्कि सीमित अवधि के लिए भूमि उपयोग का अधिकार प्रदान करना होता है। लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था कई स्थानों पर जटिल होती चली गई है। कई शहरों में निम्न स्थिति देखने में आती है: लीज़ भूमि पर बड़े-बड़े भवन बन गए भूमि के छोटे-छोटे भूखंड काटकर विक्रय कर दिए गए कई मामलों में उनकी रजिस्ट्री भी हो चुकी है ऐसी स्थिति में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि यदि लीज़धारी के पास केवल उपयोग का अधिकार था तो भूमि के टुकड़े कर विक्रय करने का अधिकार किस आधार पर दिया गया। अधिकारियों के विवेक पर निर्भर व्यवस्था लीज़ नवीनीकरण या फ्रीहोल्ड परिवर्तन के मामलों में स्पष्ट नीति के अभाव के कारण निर्णय कई बार अधिकारियों के विवेक पर निर्भर दिखाई देते हैं। इसके कारण निम्न समस्याएँ उत्पन्न होती हैं किसी की लीज़ आसानी से नवीनीकृत हो जाती है किसी का आवेदन वर्षों तक लंबित रहता है कहीं भूमि को शासकीय घोषित कर दिया जाता है। 


ऐसी स्थिति प्रशासनिक पारदर्शिता और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं कही जा सकती। अनिवार्य फ्रीहोल्ड नीति – एक व्यावहारिक समाधान वर्तमान परिस्थितियों में यह विचार गंभीरता से किया जाना चाहिए कि जिन लीज़ों की अवधि समाप्त हो चुकी है, उन्हें एक निश्चित नीति के अंतर्गत अनिवार्य रूप से फ्रीहोल्ड करने की व्यवस्था बनाई जाए।
यदि ऐसा किया जाता है तो यह व्यवस्था शासन और नागरिक दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। शासन को संभावित लाभ यदि लीज़ भूमि को निर्धारित शुल्क के साथ फ्रीहोल्ड किया जाता है तो शासन को एकमुश्त बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त हो सकता है।
राज्य की हजारों लीज़ भूमि के फ्रीहोल्ड होने से सरकार को महत्वपूर्ण आर्थिक संसाधन प्राप्त हो सकते हैं जिन्हें विकास कार्यों में उपयोग किया जा सकता है। नागरिकों को राहत फ्रीहोल्ड व्यवस्था लागू होने से नागरिकों को अपनी संपत्ति के स्वामित्व को लेकर स्पष्टता और सुरक्षा प्राप्त होगी।

इससे भविष्य के भूमि विवादों में भी कमी आएगी और नागरिकों को अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से राहत मिलेगी। भ्रष्टाचार पर नियंत्रण जब किसी व्यवस्था में निर्णय अधिकारियों के विवेक पर निर्भर रहते हैं, तब मनमानी और भ्रष्टाचार की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। यदि समाप्त लीज़ भूमि के संबंध में एक स्पष्ट और अनिवार्य फ्रीहोल्ड नीति बनाई जाती है, तो मनमानी निर्णयों की संभावना कम होगीप्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी
भ्रष्टाचार की संभावनाएँ कम होंगी मध्य प्रदेश के लिए 10 बिंदुओं वाला भूमि सुधार नीति प्रस्ताव राज्य में लीज़ भूमि से जुड़े विवादों को समाप्त करने और प्रशासनिक पारदर्शिता स्थापित करने के लिए निम्न दस बिंदुओं पर आधारित नीति बनाई जा सकती है: 1. राज्य स्तरीय सर्वे मध्य प्रदेश की सभी लीज़ भूमि का राज्य स्तर पर समग्र सर्वे कराया जाए। 2. सार्वजनिक अभिलेख सभी लीज़ भूमि का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में तैयार कर सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए। 3. समाप्त लीज़ की सूची जिन लीज़ों की अवधि समाप्त हो चुकी है उनकी सूची सार्वजनिक की जाए।

4. अनिवार्य फ्रीहोल्ड नीति समाप्त लीज़ भूमि को निर्धारित शुल्क के साथ अनिवार्य रूप से फ्रीहोल्ड करने की नीति बनाई जाए। 5. एक समान शुल्क प्रणाली फ्रीहोल्ड परिवर्तन के लिए पूरे राज्य में एक समान शुल्क निर्धारित किया जाए। 6. समय सीमा निर्धारित फ्रीहोल्ड आवेदन के निपटान के लिए निश्चित समय सीमा निर्धारित की जाए। 7. ऑनलाइन प्रक्रिया
पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए। 8. विवाद निवारण तंत्र लीज़ भूमि से जुड़े विवादों के लिए विशेष त्वरित निवारण तंत्र स्थापित किया जाए। 9. पुराने विक्रय की वैधता लीज़ भूमि पर पहले से बने निर्माण और विक्रय की स्थिति स्पष्ट करने के लिए विशेष नीति बनाई जाए। 10. प्रशासनिक जवाबदेही इस प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब या मनमानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। 

99 वर्ष की लीज़ व्यवस्था कभी प्रशासनिक आवश्यकता के कारण बनाई गई थी, लेकिन आज यह व्यवस्था कई स्थानों पर कानूनी अस्पष्टता और प्रशासनिक अनिश्चितता का कारण बनती जा रही है। अतः समय की मांग है कि मध्य प्रदेश शासन इस विषय में व्यापक विचार कर समाप्त लीज़ भूमि के संबंध में स्पष्ट नीति बनाए और आवश्यकता होने पर अनिवार्य फ्रीहोल्ड व्यवस्था लागू करे। ऐसा करने से शासन को राजस्व प्राप्त होगा, नागरिकों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, भूमि विवाद कम होंगे और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता स्थापित होगी। यह कदम न केवल शासन बल्कि जनता के हित में भी अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।