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गुजरात: आरोपियों की सार्वजनिक पिटाई पर उठे सवाल, पुलिस कार्रवाई पर कानूनी बहस

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गुजरात  Published by: Makvana Narasinhbhai Nagajibhai , Date: 20/03/2026 05:26:34 pm Share:
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  • Published by: Makvana Narasinhbhai Nagajibhai ,
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  • 20/03/2026 05:26:34 pm
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संक्षेप

गुजरात: कानूनी अधिकार का स्रोत: साहब, भारतीय न्याय संहिता (BNS) या नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में कहाँ लिखा है कि आरोपियों को सार्वजनिक रूप से उठक-बैठक करवाई जा सकती है या लाठियों से पीटा जा सकता है। 

विस्तार

गुजरात: कानूनी अधिकार का स्रोत: साहब, भारतीय न्याय संहिता (BNS) या नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में कहाँ लिखा है कि आरोपियों को सार्वजनिक रूप से उठक-बैठक करवाई जा सकती है या लाठियों से पीटा जा सकता है। कोर्ट के आदेश का उल्लंघन: डी. के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि गिरफ्तार व्यक्ति की गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए। क्या यह सार्वजनिक परेड सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सीधा उल्लंघन नहीं है? जांच को नुकसान (TIP): यदि इस मामले में गवाहों द्वारा आरोपियों की पहचान (Test Identification Parade) अभी बाकी है, तो उनका चेहरा सार्वजनिक रूप से दिखाकर क्या आप मूल केस को कमजोर नहीं कर रहे हैं?
पुलिस की विफलता छुपाने का प्रयास: जब भीड़ हमला कर रही थी तब पुलिस वैन को भागना पड़ा था। क्या यह सार्वजनिक परेड केवल उस विफलता पर पर्दा डालने और “सिंघम” जैसी छवि बनाने का प्रयास है? मानवाधिकार और कानून: कानून के अनुसार आरोपी को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है। सड़क पर ही न्याय करने का अधिकार पुलिस को किसने दिया? क्या पुलिस स्वयं ही जज और जल्लाद बन सकती है।