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उत्तर प्रदेश: सहारनपुर से अयोध्या भेजे गए गोबर से निर्मित 5,100 इको फ्रेंडली दीये, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भी भेजी गई विशेष खेप
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सहारनपुर नगर निगम की ओर से पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देने की अनूठी पहल की गई है। दीपावली के अवसर पर अयोध्या में सरयू नदी के तट और राम की पैड़ी को रोशन करने के लिए गाय के गोबर से निर्मित 5,100 इको फ्रेंडली दीये भेजे गए हैं।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सहारनपुर नगर निगम की ओर से पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देने की अनूठी पहल की गई है। दीपावली के अवसर पर अयोध्या में सरयू नदी के तट और राम की पैड़ी को रोशन करने के लिए गाय के गोबर से निर्मित 5,100 इको फ्रेंडली दीये भेजे गए हैं। इसके साथ ही इन विशेष दीयों की खेप देश की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख हस्तियों को भी भेजी गई है। महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह ने अयोध्या भेजे जाने वाले दीयों की खेप औपचारिक रूप से नगर निगम के गौशाला प्रभारी डॉ. संदीप मिश्रा को सौंपी। इस अवसर पर महापौर ने कहा कि नगर निगम की इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ दीपावली और गौवंश संवर्द्धन को प्रोत्साहित करना है। गौशाला प्रभारी डॉ. संदीप मिश्रा ने बताया कि नगर निगम द्वारा संचालित 'मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला' में गाय के शुद्ध गोबर से इन विशेष दीयों का निर्माण किया गया है। ये दीये पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल हैं। इस्तेमाल के बाद ये खाद में परिवर्तित हो जाते हैं और पानी में भी आसानी से तैर सकते हैं। इससे दीपोत्सव के दौरान पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि अयोध्या में दीपावली के अवसर पर सरयू नदी के तट, राम की पैड़ी और आसपास के घाटों पर भव्य दीपोत्सव आयोजित किया जाता है। इसी आयोजन को और अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने के उद्देश्य से सहारनपुर नगर निगम की ओर से 5,100 गोमय दीये भेजे गए हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित देश एवं प्रदेश की अन्य प्रमुख हस्तियों को भी दीपावली के अवसर पर ये विशेष गोबर से निर्मित दीये भेजे गए हैं। नगर निगम की इस पहल को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय परंपराओं के संगम के रूप में देखा जा रहा है।