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उत्तर प्रदेश: ईरान युद्ध के दौरान बहरीन में फंसी भाजपा नेता की बेटी और दामाद सुरक्षित लौटे घर 

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उत्तर प्रदेश  Published by: Ranu , Date: 18/03/2026 03:22:52 pm Share:
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  • 18/03/2026 03:22:52 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: भाजपा नेता की बेटी और दामाद ईरान युद्ध के दौरान बहरीन में फंस गए थे।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: भाजपा नेता की बेटी और दामाद ईरान युद्ध के दौरान बहरीन में फंस गए थे। उन्होंने 15 दिन कार की पार्किंग में बिताए। मंगलवार को उनकी बेटी और दामाद अपने दो बच्चों के साथ शाहजहांपुर लौटे। बेटी की वापसी पर नेता और उनका परिवार भावुक हो गया। बेटी बहरीन में एक मॉडल है और दामाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। बेटी ने बताया कि शूट के दौरान 1 किलोमीटर दूर ही एक मिसाइल हमला हुआ। हालात थोड़े सामान्य होने पर वह कार लेकर घर पहुंची। घर के बाहर भी उन्हें एक ड्रोन दिखा, जिसके बाद वह तुरंत अपने परिवार के साथ बाहर निकलीं। उन्हें एक सेफ बेसमेंट में ले जाया गया। जहां उन्होंने अन्य भारतियों के साथ 15 दिन बिताए। दामाद ने बताया कि बहरीन से भारत आने में उनके कुल 12 लाख रुपए खर्च हुए। इस बीच भाजपा नेता ने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद से मुलाकात कर बेटी और दामाद के लिए मदद भी मांगी थी।


भाजपा नेता संजय पाठक की बेटी प्रियंका पाठक बहरीन में अपने पति अनुज मिश्रा के साथ रहती हैं। अनुज एसटीसी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजिनियर हैं। प्रियंका मॉडलिंग करती हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 82.9K फॉलोवर्स हैं। प्रियंका और अनुज के दो बच्चे हैं। बेटी आव्या (4) नर्सरी में पढ़ती है। बेटा आहान (9) चौथी का छात्र है। साल 2011 से दोनों बहरीन में ही रह रहे थे। ईरान युद्ध के दौरान प्रियंका अपने परिवार के साथ वहां फंस गई थीं। इसके बाद संजय पाठक ने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद से मुलाकात कर मदद की मांग की थी। प्रियंका ने बताया- युद्ध शुरू होते ही हालात बेकाबू हो गए थे। मैं फरवरी में अपना मॉडलिंग शूट करने गई थी। तभी वहां से लगभग एक किलोमीटर दूर मिसाइल धमाका हुआ। मैंने पति अनुज मिश्रा को फोन करके बताया कि बहरीन में ईरान ने हमला कर दिया है। वह जहां पर हैं वहीं रुक जाए और स्थिति सामान्य होने तक वहीं रुक जाए। बच्चों और पति की चिंता थी, इसलिए मैं अपनी कार लेकर घर के लिए निकल पड़ी। इस दौरान मैंने रास्तों में धमाके होते हुए देखे। लोग चीख और चिल्ला रहे थे।

एयरपोर्ट बंद होने के कारण हम बहरीन में फंस गए। एक दिन मैं घर पर चाय बना रही थी तभी खिड़की के सामने एक ड्रोन दिखा। जिससे खतरे का एहसास हुआ। उसे भांपते ही मैं तुरंत घर से बाहर भागी और शोर मचाकर अपने पूरे परिवार को भी सुरक्षित स्थान पर बाहर बुला लिया। 24 से 36 घंटे तक मैं अपने परिवार के साथ गाड़ी के अंदर कुछ खाने की चीजों और पानी के साथ रही। फिर हमें दूसरे लोगों के साथ एक बेसमेंट में ले जाकर रखा गया। करीब 15 दिनों तक हमने एक कार पार्किंग में गुजारे। यह पार्किंग आर्मी एरिया के बेहद करीब था। जिससे हर पल हमले का खतरा बना हुआ था। हमारे साथ कई अन्य भारतीय परिवार भी वहां फंसे हुए थे। उनसे मिलने पर हमें राहत महसूस हुई।

प्रियंका ने बताया- रमजान का महीना होने के कारण सुबह-शाम कुछ समय के लिए हमले रुकते थे। इसी बीच हम लोग घर जाकर खाना बनाकर तुरंत बेसमेंट में लौट आते थे। ऐसे में हम लिफ्ट का उपयोग करने से बचते थे, क्योंकि धमाकों के बीच लिफ्ट में फंसने या बिजली कटने का डर रहता था, जब सड़क का रास्ता थोड़ा सुरक्षित हुआ, तो हमें सऊदी अरब ले जाया गया। फिर वहां से सोमवार को मुंबई पहुंचे। मंगलवार सुबह 9 बजे हम सकुशल अपने घर तिलहर पहुंच गए। हमारी किस्मत अच्छी थी कि हम सऊदी से निकल आए। क्योंकि हमारे निकलने के तुरंत बाद वहां के एयरपोर्ट पर फिर से हमला हुआ। अब सभी उड़ानें बंद हो चुकी हैं। कई भारतीय अभी भी वहां फंसे हुए हैं।


प्रियंका के पति अनुज ने बताया कि भारत का जो टिकट मात्र 25 हजार रुपए में मिलता था। उसके लिए प्रति व्यक्ति करीब साढ़े तीन लाख रुपए चुकाने पड़े। पूरे परिवार को सुरक्षित भारत लाने में लगभग 12 लाख रुपए का खर्च आया। गल्फ एयरवेज और इंडियन एयरवेज ने वहां फंसे लोगों को निकालने में मदद की। अनुज ने बताया कि उनका ऑफिस इंडियन एंबेसी के पास है। जिसके पास ही एक बिल्डिंग में कई धमाके हुए। उन्होंने भारत सरकार से अपील भी की थी कि खाड़ी देशों में अब भी फंसे अन्य भारतीयों को जल्द सुरक्षित निकाला जाए।