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उत्तर प्रदेश: जिंदा व्यक्ति को मृत दिखाने का खुलासा, जांच में जुटी पुलिस
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: आगरा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिंदा व्यक्ति को कागजों में मृत दिखाने के आरोप में छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: आगरा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिंदा व्यक्ति को कागजों में मृत दिखाने के आरोप में छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। बताया गया है कि यह मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि कुर्की की कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी ताराचंद ने अपने बेटे गिरीश चंद, घनश्याम दास उर्फ राजू टंडन और राजकुमार वर्मा उर्फ टीटू के साथ मिलकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर कोर्ट में खुद को मृत दिखा दिया। यह विवाद वर्ष 1999 में सिकंदरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित रूबी टावर की जमीन को लेकर शुरू हुआ था। वादी मदन गोपाल ने विद्या देवी, ताराचंद और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में 2011 में कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट और कुर्की के आदेश जारी किए। मामले का खुलासा तब हुआ जब 5 नवंबर 2025 को वादी पक्ष के राजकुमार वर्मा ने ताराचंद को स्कूटर चलाते हुए देखा और उसकी फोटो खींचकर कोर्ट में सबूत के रूप में पेश कर दी। कोर्ट के आदेश पर न्यू आगरा थाना ने जांच की, जिसमें पता चला कि ताराचंद जिंदा है और उसने 2016 में अपने नाम से स्कूटी भी खरीदी थी। इसके बाद 13 जनवरी 2026 को पुलिस ने कोर्ट में उसकी जीवित होने की रिपोर्ट दाखिल की। कोर्ट के निर्देश पर अब छह पुलिसकर्मियों समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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