Contact for Advertisement 9919916171


असम: अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस पर लक्षीगोग में तिवा समाज की जागरूकता बैठक, भाषा-संस्कृति बचाने का किया आह्वान

- Photo by : social media

असम  Published by: Rajib Doloi , Date: 10/08/2026 11:19:20 am Share:
  • असम
  • Published by: Rajib Doloi ,
  • Date:
  • 10/08/2026 11:19:20 am
Share:

संक्षेप

असम: असम अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार, 9 अगस्त को डिमोरिया क्षेत्र के लक्षीगोग गांव स्थित एलपी स्कूल में तिवा जनजाति की जागरूकता बैठक आयोजित की गई।

विस्तार

असम: असम अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार, 9 अगस्त को डिमोरिया क्षेत्र के लक्षीगोग गांव स्थित एलपी स्कूल में तिवा जनजाति की जागरूकता बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन सुबह करीब 10 बजे किया गया, जिसमें तिवा समाज के लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कलाकारों और युवाओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में तिवा राज दरबार के अध्यक्ष जुरसिंग बोरदोलोई मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा समाजसेवी अजित देउरी, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित लघु फिल्म निर्माता-निर्देशक एवं अभिनेता डॉ. राजीव डोलोई, तिवा लोक नृत्य प्रशिक्षक चिंटू बोरदोलोई, सह-प्रशिक्षक टुटु मणिकोवर, अदिति सराई सहित तिवा समाज के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जुरसिंग बोरदोलोई ने तिवा लोक भाषा, कला-संस्कृति, पारंपरिक पहनावे और सामाजिक रीति-रिवाजों के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में तिवा समाज की भाषा और सांस्कृतिक पहचान धीरे-धीरे कमजोर हो रही है। यदि समय रहते समाज के लोग जागरूक नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाना चुनौती बन सकता है।

उन्होंने आगामी जनगणना के दौरान तिवा समाज के लोगों से अपनी सही पहचान दर्ज कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनगणना में जाति के स्थान पर तिवा, भाषा के स्थान पर तिवा और धर्म के स्थान पर बिनुंग दर्ज कराया जाना चाहिए, ताकि समाज की वास्तविक पहचान आधिकारिक आंकड़ों में दर्ज हो सके। कार्यक्रम के दौरान लक्षीगोग गांव में विकास कार्यों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। जुरसिंग बोरदोलोई ने कहा कि गांव असम की राजधानी दिसपुर क्षेत्र के अंतर्गत आता है, लेकिन इसके बावजूद आज तक यहां अपेक्षित विकास नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने बेलगागुरी गांव से लक्षीगोग तक करीब 2.5 किलोमीटर लंबे मुख्य मार्ग को पक्का कराने की मांग असम सरकार के समक्ष रखी। बैठक में तिवा समाज की महिलाओं, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य तिवा समाज की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक एवं विकास संबंधी मुद्दों को सामने लाना रहा।


Featured News