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गुजरात: किसानों का बड़ा आंदोलन, उचित मुआवजे की मांग को लेकर 1111 ट्रैक्टरों की निकाली रैली

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गुजरात  Published by: Sojitra Ashaben , Date: 16/06/2026 03:13:18 pm Share:
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  • 16/06/2026 03:13:18 pm
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संक्षेप

गुजरात: किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए हाईटेंशन लाइन से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलने के विरोध में न्याय एवं अधिकार समिति की जामनगर तालुका अध्यक्ष श्रीमती आशाबेन अरविंदभाई सोजीत्रा (सैटेलाइट पार्क, रणजीतसागर रोड, जामनगर) ने किसान ट्रैक्टर रैली में शामिल होकर किसानों को समर्थन दिया तथा किसानों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से 15 जून 2026 को गांधीनगर पहुंचीं।

विस्तार

गुजरात: किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए हाईटेंशन लाइन से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलने के विरोध में न्याय एवं अधिकार समिति की जामनगर तालुका अध्यक्ष श्रीमती आशाबेन अरविंदभाई सोजीत्रा (सैटेलाइट पार्क, रणजीतसागर रोड, जामनगर) ने किसान ट्रैक्टर रैली में शामिल होकर किसानों को समर्थन दिया तथा किसानों को न्याय दिलाने के उद्देश्य से 15 जून 2026 को गांधीनगर पहुंचीं। इस किसान ट्रैक्टर रैली में पूरे गुजरात से 1111 से अधिक ट्रैक्टर शामिल हुए। यह आंदोलन किसानों के हक और अधिकारों की लड़ाई बताया गया। किसानों का आरोप है कि अदाणी/अंबानी से जुड़ी कंपनियों द्वारा किसानों की अनुमति के बिना खेतों और वाड़ियों में प्रवेश कर गड्ढे खोदे गए, खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया गया तथा दबाव बनाकर हाईटेंशन बिजली के पोल और लाइनें बिछाई गईं। किसानों का कहना है कि इसके बावजूद उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया गया। आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि किसानों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के लिए इस आंदोलन को सफल बनाना आवश्यक है। गुजरात के किसानों की आवाज सरकार तक पहुंचे और प्रभावित किसानों को पूरा मुआवजा मिले, यही इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है। किसान होने के नाते इस संघर्ष में शामिल होना और समर्थन देना जरूरी है।


उन्होंने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और किसानों की मांगों को सरकार द्वारा गंभीरता से सुना जाना चाहिए। यदि किसान खेती करना छोड़ दें और उनकी जमीनें लगातार कम होती जाएं, तो भविष्य में जनता को महंगाई और खाद्यान्न संकट का सामना करना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि एक ओर शहरीकरण और दूसरी ओर औद्योगिक विकास के कारण कृषि योग्य भूमि लगातार कम होती जा रही है। हाईटेंशन बिजली पोल और लाइनों के कारण हजारों एकड़ भूमि प्रभावित हुई है तथा ऐसी जमीनों के बाजार मूल्य में लगभग 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि किसानों पर दबाव बनाना और उनकी जमीनों पर जबरन कब्जा करना पूरी तरह गलत और गैरकानूनी है। उनका कहना है कि जमीन का वास्तविक मालिक किसान है, न कि कोई कंपनी या सरकार। किसान अपनी पैतृक भूमि के स्वामी हैं और जमीन देना या न देना उनका अधिकार है। किसानों की अनुमति के बिना उनकी भूमि पर पोल लगाना या प्रवेश करना अपराध माना जाना चाहिए। किसानों ने मांग की है कि बिजली कंपनियां किसानों की जमीन में बिना अनुमति प्रवेश न करें तथा राज्य सरकार और संबंधित कंपनियां किसानों को परेशान करना बंद करें। 


किसानों का कहना है कि उन्हें देश का अन्नदाता कहा जाता है और भारत एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए खेती को उद्योगों की तुलना में अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए। किसानों की प्रमुख मांगों में प्रत्येक बिजली पोल के लिए प्रतिमाह ₹50,000 किराया, एक पोल लगाने पर ₹2 करोड़ मुआवजा, किसानों को मुफ्त बिजली, बिजली कंपनियों में किसानों के बच्चों को रोजगार, फसल एवं जनहानि के लिए बीमा सुरक्षा, दुर्घटना की स्थिति में अस्पताल का पूरा खर्च तथा घायल व्यक्ति के काम करने में असमर्थ होने पर वेतन जैसी सुविधाएं शामिल हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि किसानों ने बड़ी संख्या में वोट देकर सरकार बनाई है, इसलिए किसानों को न्याय और अधिकार दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। न्याय एवं अधिकार समिति के प्रदेश अध्यक्ष श्री परसोतमभाई एन. मुंगरा (पटेल) ने मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल से अपेक्षा व्यक्त की है कि सरकार किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान निकाले और उचित न्याय सुनिश्चित करे। उन्होंने आशा जताई कि गुजरात सरकार इस मुद्दे का जल्द समाधान करेगी।


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