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गुजरात: मुआवजे की मांग को लेकर किसानों की विशाल ट्रैक्टर रैली, गांधीनगर पहुंचे हजारों किसान
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संक्षेप
गुजरात: गुजरात के विभिन्न गांवों में खेतों और वाड़ियों से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइनों को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
विस्तार
गुजरात: गुजरात के विभिन्न गांवों में खेतों और वाड़ियों से गुजर रही हाईटेंशन विद्युत लाइनों को लेकर किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे को लेकर सोमवार, 15 जून 2026 को किसानों द्वारा गांधीनगर में एक विशाल किसान ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में लगभग 1111 ट्रैक्टरों के साथ हजारों किसान गांधीनगर पहुंचे और अपनी समस्याओं एवं मांगों को राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया। किसानों की प्रमुख मांग है कि उनके खेतों और कृषि भूमि में लगाए जाने वाले बिजली के खंभों और हाईटेंशन लाइनों के बदले उन्हें पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। साथ ही किसानों को खेती के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाए। किसानों का कहना है कि निजी बिजली कंपनियों द्वारा लगाए गए प्रत्येक खंभे का मासिक किराया 50 हजार रुपये दिया जाए तथा जिस स्थान पर बिजली का खंभा लगाया गया है, उसका लगभग 2 करोड़ रुपये का मुआवजा किसानों को प्रदान किया जाए। इसी प्रकार मोरबी जिले के जेतपर गांव में चल रही किसान आंदोलन की उपवास छावनी को भी व्यापक समर्थन मिला। यहां आम आदमी पार्टी गुजरात प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी तथा जामजोधपुर विधायक हेमतभाई खवास ने पहुंचकर किसानों का समर्थन किया और सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यदि किसान एकजुट रहेंगे तो वे सरकार और कंपनियों के खिलाफ अपनी लड़ाई जीतकर न्याय और उचित मुआवजा प्राप्त कर सकेंगे। गांधीनगर में आयोजित इस ट्रैक्टर रैली के माध्यम से किसान सरकार को ज्ञापन सौंपकर अपने अधिकारों और न्याय की मांग कर रहे हैं। किसान नेता पालभाई आंबलिया, जो कांग्रेस से जुड़े किसान नेता भी हैं, किसानों को न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। रैली में कांग्रेस नेता करशनदास बापू भादरका सहित विभिन्न किसान संगठनों और किसान संघर्ष समितियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। रैली के दौरान किसानों और स्वयंसेवकों द्वारा पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को ठंडा पानी, छाछ, दूध, कोल्ड ड्रिंक और अन्य पेय पदार्थ वितरित कर मानवता और सद्भावना का परिचय दिया गया। इस सेवा भावना की किसानों ने सराहना करते हुए कहा कि "जय जवान, जय किसान" का संदेश आज फिर जीवंत हो उठा है। पुलिस जवानों के सहयोग और संवेदनशील व्यवहार की भी किसानों ने प्रशंसा की।
जामनगर, मोरबी और सुरेंद्रनगर सहित कई जिलों के किसान इस आंदोलन में शामिल हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक किसानों को उचित मुआवजा और न्याय नहीं मिलेगा, तब तक गांधीजी के बताए शांतिपूर्ण मार्ग पर आंदोलन जारी रहेगा। किसानों के अनुसार यह लड़ाई उनके अधिकारों और हकों की लड़ाई है। किसानों का आरोप है कि यदि निजी बिजली कंपनियां किसानों को उचित मुआवजा देतीं तो उन्हें आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाना पड़ता। उनका कहना है कि बिजली कंपनियों और सरकार की कथित मिलीभगत के कारण किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें मजबूरन आंदोलन करना पड़ रहा है। सुरेंद्रनगर जिले के कोंढ गांव में किसानों की समस्याओं को समझने के लिए विधायक गोपालभाई इटालिया ने भी दौरा किया था। किसानों का कहना है कि वह स्वयं किसान पुत्र हैं और किसानों की पीड़ा को समझते हैं। उनका उद्देश्य किसानों को न्याय दिलाना और उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाना है, न कि कोई राजनीतिक लाभ प्राप्त करना।
किसानों ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर हाईटेंशन लाइन परियोजनाओं के दौरान किसानों के खेतों में पुलिस बल तैनात कर दिया जाता है और खेत के वास्तविक मालिक होने के बावजूद किसानों को अपनी जमीन में प्रवेश तक नहीं करने दिया जाता। किसानों का कहना है कि ऐसी घटनाओं के कारण उन्हें आंदोलन और उपवास का रास्ता अपनाना पड़ा।
अंत में, न्याय एवं अधिकार समिति के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष परसोतमभाई एन. मुंगरा ने आशा व्यक्त की कि सरकार किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और उन्हें शीघ्र न्याय तथा उचित मुआवजा प्रदान करेगी।
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