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राजस्थान: ‘ताल की पाल पर काव्य लहरें’ गोष्ठी का आयोजन, कवियों ने रचनाओं से बांधा समा
- Photo by : social media
संक्षेप
राजस्थान: टोंक की दर्शनीय स्थलों के विकास की ओर जिला प्रशासन पर्यटन विभाग जनप्रतिनिधि और आमजन का ध्यान आकर्षित करने के लिए मां स्मृति संस्थान टोंक ने गुरुवार को एक लघु काव्य गोष्ठी का आयोजन चतुर्भुजी तालाब के किनारे *ताल की पाल पर काव्य लहरें किया।
विस्तार
राजस्थान: टोंक की दर्शनीय स्थलों के विकास की ओर जिला प्रशासन पर्यटन विभाग जनप्रतिनिधि और आमजन का ध्यान आकर्षित करने के लिए मां स्मृति संस्थान टोंक ने गुरुवार को एक लघु काव्य गोष्ठी का आयोजन चतुर्भुजी तालाब के किनारे *ताल की पाल पर काव्य लहरें किया। काव्य गोष्ठी का शुभारंभ राष्ट्रीय कवि प्रदीप पंवार ने चतुर्भुज की तालाब की प्राचीनता खूबसूरती का जिक्र किया और धर्म जाति न पंथ कोई हम वतन पहचान रखें।शीश पर रखें संविधान को, लब पे राष्ट्रगान रखें । प्यार मोहब्बत इश्क वार दें मातृभूमि के मानपर, सब रिश्तो में सबसे ऊपर अपना हिंदुस्तान रखें" कविता सुनाकर आनन्दित किया। युवा कवि अक्षय बोहरा ने वर्तमान युग में बुजुर्गों की पीड़ा को बहुत ही मार्मिक ढंग से "दो दिन से घर पे पूछने कोई नहीं आया बीमार तूने खाना भी खाया नहीं खाया भेजी थी खबर बेटे को हैं आखिरी सांसे बीबी की कैद से वो निकल ही नहीं पाया" सुनाकर दाद पाई। कवि दयाशंकरशर्मा ने जल के महत्व को अभिव्यक्त करते हुए अपना गीत "जल जीवन आधार है बंदे जल जीवन का सार" सुनाकर गोष्ठी को सार्थक कर दिया ।गीतकार हनुमान बादाम ने बेटी की विदाई का करूण गीत मेरी लाडो मेरी बिटिया, तू मेरी गुड़िया रानी ,बाबुल का घर छोड़ चली क्यूँ, रीत ये कैसी बेगानी " सुनाया तो सभी ने वाह वाह किया। इसी के साथ सभी कवियों ने टोंक के दर्शनीय स्थलों खूबसूरत बनाने के लिए अपील की।
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