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उत्तर प्रदेश: डॉ. अनिल कुमार ने शिक्षक प्रशिक्षण में AI आधारित शिक्षण विधियों पर दिया मार्गदर्शन
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), जौनपुर द्वारा शिक्षक शिक्षा योजना के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बयालसी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जलालपुर के समाजशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ने विषय विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय भागीदारी निभाई।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), जौनपुर द्वारा शिक्षक शिक्षा योजना के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बयालसी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जलालपुर के समाजशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ने विषय विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय भागीदारी निभाई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वित्तीय वर्ष 2025–26 के परिप्रेक्ष्य में “विभिन्न विषयों के शिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग” विषय पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया। अपने संबोधन में डॉ. कुमार ने “शिक्षा 4.0: 2025 में AI के साथ शिक्षण का भविष्य” विषय पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक का सुनियोजित उपयोग शिक्षकों के प्रशासनिक कार्यभार, जैसे लेसन प्लान तैयार करना, मूल्यांकन रूब्रिक बनाना तथा आधिकारिक पत्राचार, को काफी हद तक कम कर सकता है। इससे शिक्षकों के प्रति सप्ताह लगभग 7 से 10 घंटे तक की बचत संभव है, जिसे वे छात्रों के साथ गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संवाद में निवेश कर सकते हैं। डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि एआई शिक्षक का विकल्प नहीं है, बल्कि एक ‘एक्सोस्केलेटन’ की तरह कार्य करता है, जो प्रशासनिक थकान को कम कर शिक्षक को एक ‘स्ट्रेटेजिक मेंटर’ के रूप में विकसित होने में सहायता करता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने ACDQ फ्रेमवर्क (Act - भूमिका, Context - संदर्भ, Depth - गहराई, Questions - प्रश्न) की उपयोगिता पर भी विस्तार से चर्चा की, जो शिक्षकों को अधिक संरचित एवं प्रभावी पाठ योजना तैयार करने में मदद करता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि एआई के माध्यम से दृश्य, वीडियो और ऑडियो आधारित मल्टीमीडिया सामग्री का निर्माण अब अत्यंत कम समय में संभव हो गया है। डॉ. कुमार ने व्यक्तिगत शिक्षा (Personalized Education) की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि एआई प्रत्येक छात्र की सीखने की गति और आवश्यकता के अनुसार शिक्षण को अनुकूलित कर सकता है, जो पारंपरिक प्रणाली में चुनौतीपूर्ण रहा है। हालांकि, उन्होंने शिक्षकों को सावधान करते हुए कहा कि एआई का उपयोग सहयोगी उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए, न कि उस पर पूर्ण निर्भरता विकसित की जाए, ताकि छात्रों में आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता बनी रहे। इस अवसर पर उप शिक्षा निदेशक (डायट-जौनपुर) ने अपने संदेश में कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों को अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने डॉ. अनिल कुमार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को समयानुकूल दक्षता प्रदान करते हैं और शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा देते हैं। प्राचार्य ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि एआई आधारित शिक्षण पद्धतियां भविष्य में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं छात्र-केंद्रित बनाएंगी। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डाइट के ऑडिटोरियम हॉल में प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. कुमार के साथ अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। डॉ. अनिल कुमार वर्तमान में बयालसी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जलालपुर में समाजशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं और शिक्षा में नवीन तकनीकों के समावेश हेतु निरंतर प्रयासरत हैं।
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