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छत्तीसगढ़: आंगनबाड़ी केंद्रों में दिखी भारी अनियमितता, योजनाएं हुई कागजों तक सीमित
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संक्षेप
छत्तीसगढ़: बिलासपुर की टीम कोरबा जिले के महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की जानकारी लेने जब विभिन्न क्षेत्रों में पहुंची तब पता चला कि महिला बाल विकास विभाग के ऑफिस की तरह ही आंगन बाड़ियों में भी शासकीय योजनाएं कागजों में ही चल रही हैं।
विस्तार
छत्तीसगढ़: बिलासपुर की टीम कोरबा जिले के महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की जानकारी लेने जब विभिन्न क्षेत्रों में पहुंची तब पता चला कि महिला बाल विकास विभाग के ऑफिस की तरह ही आंगन बाड़ियों में भी शासकीय योजनाएं कागजों में ही चल रही हैं। दिनांक 4 व 5 मई को टीम कोरबा शहर के कुछ केन्द्रों में जब पहुंची तब यह देखने को मिला कि जहां -जहां गए यदि उसी का प्रतिशत की बात की जाए तो लगभग 70 प्रतिशत केन्द्रों में ताले लगे हुए थे, 20 प्रतिशत केन्द्र जो खुले मिले उसमें से 10 प्रतिशत केन्द्रों में कोई बच्चे नहीं मिले,10 प्रतिशत केन्द्रों में ही बच्चे, कार्यकर्ता ,सहायिका, मिली उन्हीं 10 प्रतिशत केन्द्रों में बच्चों का भोजन भी बना हुआ मिला लेकिन वहां भी बच्चों की संख्या कम जरूर थी, 10 प्रतिशत केन्द्र जो कहीं ना कहीं भाड़े के मकान में लग रहा है, वहां की स्थिति बद से बदतर हैं, उन्हीं में से कुछ केंद ऐसे हैं, जिसमें यदि दर्ज बच्चों के हिसाब से देखा जाए तो बच्चों के खड़े होने तक की जगह नहीं है, वहां बच्चे कैसे पढ़ते होंगे यह समझ के पड़े हैं। आंगन बाड़ियों से संचालित योजनाएं सेक्टर सुपरवाइजर की मिली भगत से भ्रष्टाचार के आगोश में समा गई हैं। देखने से ऐसा प्रतीत होता हैं कि परियोजना अधिकारी और कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय तक इस भ्रष्ट्राचार में शामिल हैं। हर साल केन्द्रों की लिपाई -पोताई के लिए लगभग 3000/रुपए जो आता हैं वह भी भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ जाता हैं, पूरे केंद्र की पुताई न करके केवल एक या दो दीवाल की पुताई करके पूरा पैसा लेकर ये सभी जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी व ठेकेदार खा जाते है। केंद्रों में दर्ज संख्या के आधार पर सारी योजनाएं लागू होती हैं लेकिन हितग्राहियों की स्थिति अलग है। इसी का फायदा उठा कर बचे हुए सामग्री को संभवत बेंच दिया जाता हैं।और भ्रष्टाचार में लिप्त लोग आपस में बांट लेते हैं। आंगन बाड़ियों में दिए जाने वाले सामान इतने घटिया स्तर का रहता हैं कि कुछ दिनों में ही टूट फुट जाता हैं। यदि सत्यापन कराया जाए तो पता चलेगा कि तमाम सामग्री तो केन्द्रों तक पहुंची ही नहीं है। रास्ते में ही हेरा -फेरी कर दी गई है। आंगन बाड़ियों में लगने वाली T V, वाटर RO, वाल प्रिंट तो 30 प्रतिशत केन्द्रों में भी नहीं लगा है। ऐसा प्रतीत होता है कि परियोजना एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के अधिकारी केन्द्रों में जाते ही नहीं हैं। आफिस में ही बैठकर AC की हवा खा रहे हैं। यह सब हाल तब है जब पूरे छत्तीसगढ़ के साथ -साथ कोरबा में भी लोक सुराज अभियान दस्तक दे चुका है। अब देखना है कि समाचार प्रकाशन के बाद प्रशासन क्या रुख अख्तियार करता है, सही मायने में तो आंगन बाड़ियों, नन्द घरों, बाल बाड़ियों की स्थिति ठीक नहीं है। सरकार को इसपर ध्यान देने की जरूरत है। इन सभी भ्रष्टाचार की शिकायत कई बार कार्यालयों में पहुंचती हैं, लेकिन जब जिम्मेदार लोग ही इन भ्रष्टाचार में शामिल हैं तो जांच भला कैसे होगी, वहीं कहावत चरितार्थ हो रही हैं कि जब रक्ष क ही भक्ष क बन जाता हैं तो बिस्वास नाम की चीज ही नहीं बचती हैं। इंडिया न्यूज़ दर्शन संभाग बिलासपुर की टीम आंगन बाड़ियों की स्थिति से सेक्टर सुपरवाइजर से लेकर परियोजना अधिकारी एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय तक पहुंच दी है और आशा करती हैं कि संभवत आगे चलकर सब ठीक जायेगा।
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