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गुजरात: कुकड़दा गांव में आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा दिवासा पर्व
- Photo by : social media
विस्तार
गुजरात: नसवाड़ी तहसील के कुकड़दा गांव में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार दिवासा पर्व का भव्य आयोजन किया गया। पर्व के दौरान आदिवासी संस्कृति, लोक परंपरा और सामूहिक एकता की अनूठी झलक देखने को मिली। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण आयोजन में शामिल हुए, जिससे पूरे गांव में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। दिवासा पर्व के दौरान युवाओं ने पारंपरिक पीहा वाद्य बजाकर वातावरण को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। पीहा के मधुर और तालबद्ध सुरों के बीच पारंपरिक एकरंगी परिधान पहने युवतियों ने हाथों में हाथ मिलाकर गोल घेरा बनाया और लोकनृत्य प्रस्तुत किया। युवतियों के पारंपरिक नृत्य ने उपस्थित ग्रामीणों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। पारंपरिक परिधान, लोकवाद्य और लोकनृत्य के संगम से पूरा कुकड़दा गांव आदिवासी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। कार्यक्रम में युवाओं और युवतियों के साथ बुजुर्गों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान ग्रामीणों ने वर्षों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का संदेश दिया। ग्रामीणों के अनुसार दिवासा पर्व केवल धार्मिक और सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि डूंगर क्षेत्र की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक एकता का प्रतीक है। पर्व के माध्यम से लोक संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों को जीवंत बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। खास बात यह रही कि नई पीढ़ी ने भी पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पीहा वाद्य के सुरों और पारंपरिक लोकनृत्य ने पूरे माहौल में उत्साह भर दिया। ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने आदिवासी संस्कृति की इस अनूठी झलक का आनंद लिया।
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