Contact for Advertisement 9919916171


झारखण्ड: आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे दीपांकर भट्टाचार्य, जमीन-अधिग्रहण और कोयला खनन के खिलाफ संघर्ष को दिया समर्थन
 

- Photo by : social media

झारखण्ड  Published by: Md Samir , Date: 13/08/2026 12:04:59 pm Share:
  • झारखण्ड
  • Published by: Md Samir ,
  • Date:
  • 13/08/2026 12:04:59 pm
Share:

संक्षेप

झारखण्ड: बड़कागांव प्रखंड के गोंदलपुरा क्षेत्र में पिछले करीब चार वर्षों से जारी आंदोलन के बीच आज भाकपा (माले) के केंद्रीय महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे। 

विस्तार

झारखण्ड: बड़कागांव प्रखंड के गोंदलपुरा क्षेत्र में पिछले करीब चार वर्षों से जारी आंदोलन के बीच आज भाकपा (माले) के केंद्रीय महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और मांगों को विस्तार से सुना। इस दौरान आंदोलनकारियों ने एकजुट होकर अपनी बातें कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य के सामने रखीं। उन्होंने ग्रामीणों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि उनकी समस्याओं और मांगों को सांसद, लोकसभा और विधानसभा सहित संबंधित स्तरों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

ग्रामीणों का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य अपनी जमीन, खेती और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना है। उनकी प्रमुख मांग है कि क्षेत्र में जमीन का अधिग्रहण न किया जाए, कोयला खनन की अनुमति न दी जाए और प्रस्तावित कोयला परियोजना का आवंटन रद्द किया जाए। आंदोलनकारियों के अनुसार, गोंदलपुरा क्षेत्र के अधिकांश लोग खेती-किसानी पर निर्भर हैं। उनका कहना है कि कम बारिश के बावजूद यहां की जमीन पर अच्छी फसल होती है और वर्षभर विभिन्न प्रकार की फसलें उगाकर ग्रामीण अपना जीवन-यापन करते हैं।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि क्षेत्र की पहाड़ियों और जंगलों में कई प्रकार की प्राकृतिक जड़ी-बूटियां और औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जिनका स्थानीय लोग वर्षों से पारंपरिक उपचार में इस्तेमाल करते आ रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि खनन शुरू होने से जंगल और पहाड़ी क्षेत्र प्रभावित होंगे तथा इन प्राकृतिक संसाधनों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। ग्रामीणों ने क्षेत्र की नदी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इस नदी पर आसपास के हजारों लोगों की आजीविका और दैनिक जीवन निर्भर है। उनका दावा है कि यदि क्षेत्र में खनन शुरू हुआ तो नदी, जंगल, खेती और जलस्रोतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।ग्रामीणों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल जमीन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेती, जल, जंगल, पहाड़ और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने की लड़ाई है। कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य के दौरे से आंदोलनकारियों में नया उत्साह देखने को मिला।


Featured News