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झारखंड: तीन साल बाद भी स्वास्थ्य सुविधा से वंचित ग्रामीण, NTPC के खिलाफ बढ़ा आक्रोश

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झारखंड  Published by: Md Samir , Date: 16/07/2026 10:49:01 am Share:
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  • 16/07/2026 10:49:01 am
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झारखंड: केरेडारी थाना क्षेत्र के पांडु गांव में संचालित एनटीपीसी कोल माइंस परियोजना को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन कार्य शुरू हुए तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कंपनी ने अब तक क्षेत्र में स्वास्थ्य, रोजगार और पुनर्वास जैसी बुनियादी सुविधाओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इससे प्रभावित परिवारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कोयला खनन के कारण क्षेत्र में धूल और प्रदूषण बढ़ गया है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसके बावजूद माइंस क्षेत्र के आसपास अब तक एक अस्पताल तक नहीं बनाया गया है। किसी भी आपात स्थिति में ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर इलाज के लिए जाना पड़ता है, जिससे समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि एनटीपीसी ने स्थानीय लोगों से बिना किसी पूर्व चर्चा या सहमति के क्रेशर का संचालन शुरू कर दिया। उनका कहना है कि परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में स्थानीय लोगों की राय को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।रोजगार को लेकर भी लोगों में असंतोष है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी स्थानीय युवाओं और विस्थापित परिवारों को प्राथमिकता देने के बजाय बाहरी लोगों को रोजगार दे रही है। वहीं, स्थानीय युवाओं को केवल आश्वासन और कागजी प्रक्रियाओं में उलझाकर रखा जा रहा है। विस्थापित परिवारों का कहना है कि पुनर्वास और मुआवजे के जो वादे किए गए थे, वे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। कई परिवार आज भी अपने अधिकारों और उचित मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि क्षेत्र की पिछड़ी जातियों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए कंपनी की ओर से कोई प्रभावी कल्याणकारी योजना नहीं चलाई गई है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि माइंस क्षेत्र के पास जल्द से जल्द एक आधुनिक अस्पताल बनाया जाए, स्थानीय लोगों के साथ पारदर्शी वार्ता शुरू की जाए, रोजगार में विस्थापितों और पंचायत के युवाओं को प्राथमिकता दी जाए तथा मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। अब सभी की नजर एनटीपीसी प्रबंधन और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।


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