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मध्य प्रदेश: धामनोद के DPIS स्कूल में श्रद्धा, संस्कार और कृतज्ञता के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा पर्व
- Photo by : social media
विस्तार
मध्य प्रदेश: दिल्ली पब्लिक इंटरनेशनल स्कूल (DPIS), धामनोद में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता की भावना के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने गुरु के महत्व को याद करते हुए उनके प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और आभार व्यक्त किया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुरु-शिष्य परंपरा और जीवन में गुरु के महत्व से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु पूजन के साथ किया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने गुरु की महिमा और उनके जीवन में महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावनाओं को व्यक्त किया। इस अवसर पर संगीत प्रस्तुति के जरिए गुरु की महिमा का गुणगान किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुति भी दी। इसके अलावा प्रभावशाली लघु नाटिका के माध्यम से गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध, गुरु के मार्गदर्शन और जीवन निर्माण में उनके योगदान को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की गई। समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण उस समय देखने को मिला, जब विद्यार्थियों ने अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे जीवनभर अपने गुरुओं द्वारा दिए गए आदर्शों, शिक्षाओं और संस्कारों का सम्मान करेंगे और उनके प्रति सदैव श्रद्धा एवं आभार की भावना बनाए रखेंगे। इस अवसर पर विद्यालय के संचालक विजय पारीक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु हमारे जीवन के ऐसे प्रकाशस्तंभ हैं, जो हमें ज्ञान देने के साथ-साथ सही दिशा और जीवन के मूल्यों का मार्ग भी दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल उनके चरणों में नमन करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाना ही गुरु के प्रति सच्ची कृतज्ञता है। विद्यालय परिवार ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी गुरुओं के प्रति श्रद्धा अर्पित करते हुए उनके अमूल्य योगदान को नमन किया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों के मन में गुरु के प्रति सम्मान और जीवनभर कृतज्ञता की भावना को और अधिक मजबूत किया। आयोजन के दौरान विद्यालय परिसर में श्रद्धा, संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा की भावना का सुंदर वातावरण देखने को मिला।