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मध्य प्रदेश: मूंदी में दशहरा जुलूस पर मुस्लिम समाज ने की भव्य पुष्पवर्षा, गले मिलकर दी शुभकामनाएं
- Photo by : social media
संक्षेप
मध्य प्रदेश: मूंदी धार्मिक आस्था, आपसी प्रेम और सामाजिक सद्भाव की अनूठी मिसाल पेश करने वाले मूंदी नगर में विजयादशमी के अवसर पर वर्षों पुरानी परंपरा एक बार फिर उत्साह और आत्मीयता के साथ निभाई गई।
विस्तार
मध्य प्रदेश: मूंदी धार्मिक आस्था, आपसी प्रेम और सामाजिक सद्भाव की अनूठी मिसाल पेश करने वाले मूंदी नगर में विजयादशमी के अवसर पर वर्षों पुरानी परंपरा एक बार फिर उत्साह और आत्मीयता के साथ निभाई गई। दशहरा पूजन के लिए निकले जुलूस का मुस्लिम समाज के सदस्यों ने भव्य पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे पर फूल बरसाकर, गले मिलकर और दशहरा पर्व की शुभकामनाएं देकर आपसी भाईचारे का संदेश दिया। पर्व के इस आयोजन में धार्मिक उत्साह के साथ सामाजिक एकता की ऐसी तस्वीर नजर आई, जो मूंदी की साझा सांस्कृतिक विरासत और परस्पर सम्मान की भावना को दर्शाती है। परंपरा के अनुसार, समाजसेवी नहारू पटेल के निवास से बड़ी संख्या में नगरवासी बैंड-बाजे के साथ दशहरा पूजन के लिए दशहरा मैदान की ओर रवाना हुए। जुलूस में शामिल लोगों का मुस्लिम समाज के सदस्यों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। स्वागत के दौरान उत्साह और आत्मीयता का माहौल रहा। यह आयोजन केवल एक धार्मिक पर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच वर्षों से बने विश्वास, अपनत्व और मेल-मिलाप की भावना को भी सामने लाया। नई पीढ़ी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रही है: विधायक नारायण पटेल मांधाता विधायक नारायण पटेल ने मूंदी की इस परंपरा को सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव से जोड़ते हुए कहा कि नगर में वर्षों से चली आ रही परंपरा को नई पीढ़ी द्वारा भी आगे बढ़ाया जाना बेहद अच्छी बात है। जब युवा पीढ़ी अपने बुजुर्गों से मिली परंपराओं, संस्कारों और आपसी सम्मान की भावना को अपनाती है, तो समाज की एकता और मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि मूंदी में सभी त्योहार मिल-जुलकर मनाने की परंपरा रही है। यहां विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनते हैं और त्योहारों की खुशियां भी साथ बांटते हैं। ऐसी परंपराएं समाज में आपसी विश्वास कायम रखने के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी एकता और सद्भाव का महत्व समझाती हैं। विधायक के अनुसार, मूंदी की यही सामूहिक भावना नगर की सामाजिक पहचान को विशेष बनाती है। परंपराओं को जीवित रखना ही सामाजिक एकता की असली ताकत: चंद्रमोहन राठौर सांसद प्रतिनिधि चंद्रमोहन राठौर ने भी इस आयोजन को मूंदी की वर्षों पुरानी परंपरा और आपसी भाईचारे का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी नगर की पहचान केवल उसकी इमारतों या विकास कार्यों से नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के आपसी संबंधों, संस्कारों और एक-दूसरे के प्रति सम्मान से भी बनती है। उन्होंने कहा कि मूंदी में वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को आज की पीढ़ी द्वारा निभाया जाना सुखद है। जब एक समाज दूसरे समाज के धार्मिक पर्व में सम्मान और आत्मीयता के साथ सहभागी बनता है, तो आपसी रिश्ते और मजबूत होते हैं। त्योहार लोगों को जोड़ने का अवसर होते हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को यह सीख मिलती है कि धार्मिक आस्था अपनी जगह है, लेकिन एक-दूसरे के प्रति सम्मान, प्रेम और भाईचारा सामाजिक जीवन की सबसे महत्वपूर्ण पूंजी है। “मूंदी अनोखा नगर है, यहां मंदिर की आरती और मस्जिद की अजान हमेशा गूंजती रहे” वरिष्ठ शिक्षक सीताराम मालाकार ने मूंदी की सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मूंदी नगर अपने आप में अनोखा है। उनके अनुसार, नगर में लंबे समय से विभिन्न समुदायों के लोग आपसी मेल-मिलाप और सद्भाव के साथ रहते आए हैं। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव में मूंदी में आज तक सांप्रदायिक तनाव जैसी स्थिति देखने को नहीं मिली है। उन्होंने भावुक शब्दों में कामना की कि मूंदी में हमेशा इसी तरह प्रेम, शांति और भाईचारे का वातावरण बना रहे। मंदिरों में आरती की गूंज और मस्जिदों से अजान की आवाज एक साथ सुनाई देती रहे तथा दोनों समुदायों के बीच सम्मान और विश्वास की यह परंपरा कभी कमजोर न पड़े। शिक्षक मालाकार की यह भावना आयोजन के व्यापक संदेश को सामने लाती है कि किसी भी समाज की वास्तविक सुंदरता उसकी विविधता को स्वीकार करने, एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने और मिल-जुलकर रहने में है। जब नई पीढ़ी ऐसी परंपराओं को आगे बढ़ाती है, तो सामाजिक सद्भाव केवल एक विचार नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन जाता है। जनप्रतिनिधियों और नगरवासियों की रही सहभागिता दशहरा पूजन के जुलूस में मांधाता विधायक नारायण पटेल, सांसद प्रतिनिधि चंद्रमोहन राठौर, कांग्रेस नेता सोनू गुर्जर, नगर परिषद उपाध्यक्ष राजनारायण मंडलोई,अन्टु शर्मा,बंटी चन्द्रवंशी सहित बड़ी संख्या में समाजजन और नगरवासी शामिल हुए। मुस्लिम समाज की ओर से सलामू खत्री, गब्बर खत्री, जाफर बाबा, डां.अब्दुला बोहरा, इम्तियाज खान, भुरू मंसूरी, कादर बोहरा, हुजैफा बोहरा, असलम खत्री, यूनुस बैग, डॉ. रिदवान सहित अन्य लोगों ने सहभागिता की। मूंदी में विजयादशमी के अवसर पर निभाई जाने वाली यह परंपरा वर्षों से नगरवासियों को आपस में जोड़ती आ रही है। इस बार भी पुष्पवर्षा, आत्मीय स्वागत और शुभकामनाओं के आदान-प्रदान ने यही संदेश दिया कि त्योहारों की खुशियां तब और बढ़ जाती हैं, जब पूरा नगर मिलकर उनका हिस्सा बनता है। मूंदी की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ आपसी सम्मान, साझा संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों तक भाईचारे की विरासत पहुंचाने का प्रेरक उदाहरण बनी।