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उत्तर प्रदेश: ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती का अस्तित्व संकट में, सुविधाओं के अभाव से खिलाड़ी निराश
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: हमारे देश में प्राचीन रामायण एवं महाभारत काल से ही मल्ल युद्ध के नाम से प्रचलित कुश्ती खेल धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों में अपना अस्तित्व खोती चली जा रही है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: हमारे देश में प्राचीन रामायण एवं महाभारत काल से ही मल्ल युद्ध के नाम से प्रचलित कुश्ती खेल धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों में अपना अस्तित्व खोती चली जा रही है। भगत सिंह खेल अकादमी संस्थापक/ संचालक राष्ट्रीय पहलवान अमरजीत यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को अलग पहचान दिलाने वाला खेल कुश्ती था लेकिन बदलते समय के दौर में विलुप्त होती चली जा रही है। इसका सबसे प्रमुख कारण है। सुविधाओं एवं संसाधनों का अभाव तथा मार्ग दर्शन की कमी देश के ग्रामीण अंचलों में चलने वाली इस खेल विधा को आगे बढ़ाने के लिए सन् 1995 में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री माननीय श्रद्धेय मुलायम सिंह यादव जी ने हर व्लाक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती अखाड़ा का निर्माण करवाकर स्थानीय लोगों को प्रतिनिधित्व दिए थे और संचालको को 500 रूपये प्रोत्साहन के रूप में देते थे लेकिन सरकार बदलते ही वह योजना बंद हो गई, जबकि बहुत जगह पर वह अखाड़े आज भी चल रहें है। हमारे गांव में स्व गुरु खरपत्तू पहलवान जी के मार्गदर्शन में चलने वाला अखाड़ा आज भी चल रहा है। उसी अखाड़े की देन है कि चड ई गांव में सैकड़ों राष्ट्रीय पहलवान तथा दर्जनों राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती प्रशिक्षक देश एवं प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर कुश्ती खेल को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। इसके बाद सन् 2013 में कांग्रेस सरकार द्वारा एक योजना पायका केंद्र के नाम से आई थी जो न्याय पंचायत स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में खिलाड़ियों को जागरूक कर आगे बढ़ाने के लिए आई थी सरकार बदलते ही वह भी राजनीति की भेंट चढ़ गई इससे ग्रामीण क्षेत्र से निकलने वाले खिलाड़ियों को बहुत ही झटका लगा वर्तमान सरकार की आज तक कोई भी ऐसी योजना नहीं आई जो ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में मदद कर सके पहले युवा कल्याण विभाग द्वारा हर ब्लॉक स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं होती थी तथा हर ग्रामीण क्षेत्रों में साल में एक बार खेल का सामान निशुल्क वितरित होता था, लेकिन अब कई सालों से खेल का सामान मिलना बंद हो गया है और ग्रामीण खेल कूद प्रतियोगिता को विधायक प्रतियोगिता नाम देकर ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों के सपने को तोड़ दिया गया है इससे ग्रामीण खिलाड़ियों का बहुत ही नुकसान हुआ है तथा जो भी खिलाड़ी ब्लॉक जिला खेल कर राज्य स्तर तक जाती थे। वह विधानसभा खेल के बाद घर बैठे पड़े हैं। ऐसी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाएं कैसे आगे आएंगी राष्ट्रीय पहलवान अमरजीत यादव ने कहा कि जब तक ग्रामीण खिलाड़ियों को अवसर नहीं मिलेगा तब तक देश की खेल व्यवस्था भाषणों और कागजों से निकल जमीन पर नहीं आएगी तब तक देश में खेल की दुर्दशा बनी रहेगी। अरविंद यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ी गांव में खेल मैदान के लिए भटक रहे हैं लेकिन खिलाड़ियों को कहीं स्थान नहीं मिल रहा।
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