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छत्तीसगढ़: बाल विवाह पर लगाई रोक, प्रशासन की सतर्कता से नाबालिग मिली सुरक्षित

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छत्तीसगढ़  Published by: Prabhesh Mishra , Date: 01/04/2026 05:00:24 pm Share:
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  • 01/04/2026 05:00:24 pm
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संक्षेप

छत्तीसगढ़: सूरजपुर बाल विवाह मुक्त सूरजपुर बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह चुस्त है। 

विस्तार

छत्तीसगढ़: सूरजपुर बाल विवाह मुक्त सूरजपुर बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ बनाने के लिए प्रशासन पूरी तरह चुस्त है। कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन के मार्गदर्शन में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री शुभम बंसल एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री मनोज जायसवाल के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाईल्ड लाईन एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम पूरी तरह से सक्रिय है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी को पूर्व में जानकारी प्राप्त हुई थी कि एक 17 वार्षिय बालिका का बाल विवाह भैयाथान के एक ग्राम में किया जा रहा है। बालिका का मण्डप 28 मार्च एवं विवाह 30 मार्च को होना है। सूचना प्राप्त होते ही जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री शुभम् बंसल को दी गई जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देश पर गांव में संयुक्त टीम गई जहां बालिका के परिजन उम्र हो जाने पर विवाह करने की सहमति दिये और विवाह रोकने का पंचनामा, कथन बालिका का स्कूल का दस्तावेज लिया गया। 30 मार्च को शाम फिर सूचना प्राप्त हुई कि बारात आ रहा है और विवाह की पूरी तैयारी हो चुकी है। आज ही विवाह सम्पन्न होने वाला है। मेहमान आ गये है, विवाह हेतु टेन्ट लगाया गया है, भोजन बन रहा है और पूरी धूमधाम के साथ विवाह होने वाला है। इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री मनोज जायसवाल ने इस बात की सूचना जिला कार्यक्रम अधिकारी को दी जिला कार्यक्रम अधिकारी के निर्देश पर शाम 7ः00 बजे संयुक्त टीम भैयाथान के उक्त ग्राम के लिए रवाना हुई टीम पर्याप्त पुलिस बल के साथ गांव पहुंची तो सूचना के अनुसार टेन्ट पण्डाल लाईट, डेकोरेशन और मेहमानों का मजमा लगा हुआ था। बात चीत करने पर विवाह की संभावना लग रही रही थी जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने बारात की स्थिति जानने के लिए संबंधित थाने में फोन लगा कर बात की तो पता चला की वहां से बारात निकलने वाली है। गांव में सरपंच एवं सचिव सम्बन्धित पर्यवेक्षक को बुलाया गया। 

 

बालिका के परिजनों को बताया गया कि पूर्व में पंचनामा और आय दस्तावेज तैयार किया गया था विवाह नहीं करने को सभी सहमत थे तो क्यों किया जा रहा है। तो परिजनों ने कहा कि विवाह नहीं कर रह है। और दावत दे रहे है। टीम द्वारा या तो विवाह पर अपराध पंजीबद्ध करने की बात कही या फिर बालिका को बाल कल्याण समिति में प्रस्तुत करने हेतु अपने साथ ले जाने की बात कही समझाया गया कि बालिका को सखी वन स्टॉप सेन्टर में रखा जायेगा जहां केवल महिलाएँ रहती है। बालिका के साथ और भी महिलाए जा सकती है। बहुत जद्दो जहद के बाद परिजन बालिका को भेजने को तैयार हुए। संयुक्त टीम के मौजुद महिला कर्मचारियों द्वारा रात्रि 9ः00 बजे बालिका को लेकर बाल कल्याण समिति को सूचित कर समिति के आदेश से सखी वन स्टॉप सेन्टर में रखा गया है। बालिका अभी बाल कल्याण समिति के आदेश पर सखी वन स्टॉप सेन्टर में सुरक्षित है। बाल विवाह के इस कार्यवाही में जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री मनोज जायसवाल, परामर्शदाता जेनेन्द्र दुबे, आउटरीच वर्कर श्रीमती आरती राजवाड़े, चाईल्ड लाईन से जनार्दन यादव, दिनेश यादव, कुमारी रीता सिंह, पर्यवेक्षक श्रीमती शीला वर्मा, सरपंच पति श्री दीपक कुमार, सचिय आनंद सिंह एवं बसदेई पुलिस चौकी से प्रधान आरक्षक श्री महेन्द्र, महिला प्रधान आरक्षक अलका टोप्पो, आरक्षक राकेश सिंह, रामकुमार, दिलीप साहू, आदित्य यादव, महिला आक्षक प्रफुल्ला मिंज, पूनम सिंह उपस्थित थे।