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झारखंड: कोयला खनन और ब्लास्टिंग से ग्रामीण परेशान, अस्पताल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे गंभीर सवाल
- Photo by : social media
विस्तार
झारखंड: हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड अंतर्गत पांडु गांव में एनटीपीसी द्वारा कोयला खनन का कार्य तेजी से जारी है। यहां माइनिंग डेवलपर एंड ऑपरेटर यानी एमडीओ के तौर पर बीजीआर कंपनी खनन गतिविधियों को संचालित कर रही है। हालांकि, खनन क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों ने ब्लास्टिंग, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है। ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान सामने आया कि खनन क्षेत्र से करीब 100 से 200 मीटर की दूरी पर कई ग्रामीण परिवार निवास कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन के दौरान होने वाली भारी ब्लास्टिंग से उनके घरों में कंपन होता है और कई मकानों की दीवारों व छतों में दरारें आने लगी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ब्लास्टिंग के दौरान उन्हें हमेशा किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि खनन गतिविधियों के कारण उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, ब्लास्टिंग के दौरान होने वाले तेज कंपन और धमाकों से उनके घरों को नुकसान पहुंचने का डर बना रहता है। ऐसे में प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के समाधान को लेकर प्रशासन और संबंधित कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि खनन परियोजना को शुरू हुए तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन क्षेत्र में अब तक पर्याप्त चिकित्सा सुविधा या अस्पताल उपलब्ध नहीं कराया गया है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि खनन क्षेत्र में किसी मजदूर या स्थानीय व्यक्ति के साथ कोई दुर्घटना होती है, तो उसे तत्काल प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सुविधा कैसे मिलेगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन परियोजना से प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन और परियोजना प्रबंधन से ब्लास्टिंग की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने, मकानों को हुए संभावित नुकसान का सर्वे कराने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। पांडु गांव के ग्रामीणों की शिकायतों ने खनन परियोजना के साथ-साथ सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित प्रबंधन ग्रामीणों की इन चिंताओं पर क्या कदम उठाते हैं और प्रभावित लोगों की समस्याओं का समाधान कब तक होता है।