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राजस्थान: गुरु पूर्णिमा पर बल्लिया जागरूक धूणी में भव्य हुआ आयोजन, कथावाचक कमलेश जी शास्त्री ने दिया धर्म और एकता का संदेश
- Photo by : social media
विस्तार
राजस्थान: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बल्लिया जागरूक धूणी में भव्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु धूणी परिसर में पहुंचे और भगवान भोलेनाथ एवं गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया। भजन, कीर्तन, सत्संग और कथा के साथ पूरा परिसर दिनभर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।कार्यक्रम में कथावाचक कमलेश जी शास्त्री ने कथा के माध्यम से सनातन संस्कृति, धर्म, हिंदुत्व, आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से आपसी मतभेदों को भुलाकर समाज और सनातन संस्कृति की मजबूती के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया। कथा और संत-महात्माओं के आशीर्वचनों को सुनने के लिए दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचे। कार्यक्रम में वागड़ की बेटी रौशनी बारोट भी विशेष रूप से मौजूद रहीं। उन्होंने अपनी मातृभूमि और वागड़ क्षेत्र से जुड़ाव व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी जन्मभूमि और मातृभूमि ही उनकी पहचान है। उन्होंने वागड़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने को अपने लिए गर्व की बात बताया। रौशनी बारोट मॉडल, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। वे NIM Foundation की संस्थापक भी हैं और महिला सशक्तिकरण तथा जरूरतमंदों की सहायता जैसे सामाजिक कार्यों से जुड़ी हुई हैं। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उनसे मिलने और फोटो खिंचवाने को लेकर भी उत्साह देखने को मिला। इस अवसर पर कमलेश जी बावलिया, केडी, लोकेश, विनय सहित कई क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। उन्होंने कथा, भजन और सत्संग का आनंद लिया और धार्मिक एवं सामाजिक संदेशों को लोगों तक पहुंचाने में अपनी भागीदारी निभाई। कार्यक्रम को सफल बनाने में बल्लिया और आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं, युवाओं, बुजुर्गों, मातृशक्ति, आयोजन समिति और सेवा में जुटी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी ने मिलकर श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं संभालीं और आयोजन को शांतिपूर्ण एवं भक्तिमय बनाने में सहयोग किया। गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन पूरे वागड़ क्षेत्र के श्रद्धालुओं, गांववासियों, संत-महात्माओं, कथावाचक, आयोजक टीम और सभी सहयोगियों की सामूहिक आस्था और सहभागिता का उत्सव बना। पूरे दिन बल्लिया जागरूक धूणी में भक्ति, श्रद्धा, सनातन संस्कृति, भाईचारे और आपसी मिलन का माहौल बना रहा। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार आध्यात्मिक अनुभव बनकर सामने आया।