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राजस्थान: ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के विरोध में चल रहा किसान महापंचायत का 03 दिवसीय धरना प्रदर्शन समाप्त
- Photo by : social media
संक्षेप
राजस्थान: आंदोलन के अंतिम दिन धरना स्थल पर पहुंचे एसडीएम को किसानों ने जिला कलक्टर के नाम सौंपा 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन, एक्सप्रेस वे परियोजना को शीघ्र निरस्त करने की मांग।
विस्तार
राजस्थान: आंदोलन के अंतिम दिन धरना स्थल पर पहुंचे एसडीएम को किसानों ने जिला कलक्टर के नाम सौंपा 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन, एक्सप्रेस वे परियोजना को शीघ्र निरस्त करने की मांग। कोटपूतली से किशनगढ़ के बीच प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सप्रैस वे के विरोध में किसान महापंचायत के बैनर तले किसानों द्वारा जिला कलेक्ट्रेट पर दिया जा रहा 03 दिवसीय धरना प्रदर्शन बुधवार 17 जून को समाप्त हो गया। प्रदर्षन में क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने “जान देंगे, जमीन नहीं देंगे“ के नारों के साथ भूमि अधिग्रहण के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंका। धरना प्रदर्शन के अंतिम दिन बुधवार दोपहर 02 बजे किसान महापंचायत के पदाधिकारियों व बड़ी संख्या में एकत्रित किसानों ने एसडीएम को जिला कलक्टर के नाम 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में एक्सप्रेस वे परियोजना को तुरंत निरस्त करने या इसका मार्ग बदलने की प्रमुख मांग रखी गई है। किसानों का आरोप है कि यह महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना पूरी तरह से जन, जंगल, जमीन और जानवर विरोधी नीतियों का नतीजा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा। किसानों का तर्क है कि कोटपूतली से किशनगढ़ तक पहले से ही 225 किलोमीटर लंबा 06 लेन राष्ट्रीय राजमार्ग सुचारू रूप से चालू है, इस मार्ग पर अतिक्रमण हटाकर इसे और चौड़ा करने का विकल्प मौजूद है। ऐसे में इसके समानांतर एक नया एक्सप्रेस वे बनाना पूरी तरह से अनावश्यक है, जिससे केवल 44 किलोमीटर (सर्वेक्षणों के अनुसार 12 से 17 किमी) की दूरी कम होगी। वहीं इस नए मार्ग के निर्माण के लिए लगभग 6500 बीघा बहु-फसली और सिंचित कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है, उपजाऊ जमीन छिनने से देश की खाद्य सुरक्षा संकट में आ जाएगी और हजारों किसान परिवार अपनी आजीविका खोकर बेघर हो जायेगें। प्रस्तावित एक्सप्रेस वे जमीन से 15 फीट ऊंचा बनना तय हुआ है, इतनी ऊंचाई के कारण कई गांव और किसानों के खेत दो हिस्सों में विभाजित हो जायेगें। किसानों को अपने ही खेतों तक पहुंचने के लिए मीलों लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे ग्रामीण भाईचारा और कनेक्टिविटी पूरी तरह खत्म हो जायेगी। किसान महापंचायत के प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश बिजारणिया ने बताया कि महापंचायत के जिलाध्यक्ष बाबूलाल चौधरी, तहसील अध्यक्ष हरसहाय तंवर ने किसानों से एकजुट होने की अपील की है। किसान नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसानों के हकों को मारकर किया जाने वाला कोई भी निर्माण स्वीकार नहीं किया जायेगा। यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो इस आंदोलन को आने वाले दिनों में और अधिक उग्र किया जायेगा। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास के नेतृत्व में जोधपुरा संघर्ष समिति व कांसली-शुक्लावास सड़क बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। जिन्होंने किसान महापंचायत के 03 दिवसीय धरने को अपना पूर्ण समर्थन दिया। धरने को संबोधित करते हुए राधेश्याम शुक्लावास ने सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि नया एक्सप्रेस वे बनाने के बजाय सरकार को दिल्ली से किशनगढ़ तक राष्ट्रीय राजमार्ग 48 की जर्जर दशा सुधारने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये। उन्होंने कहा कि किसानों की रोजी-रोटी छीनकर उन्हें बेघर करने की इस नीति का पुरजोर विरोध किया जायेगा। जब तक प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे को पूरी तरह निरस्त नहीं किया जाता, तब तक हमारा यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। महापंचायत में गरज उठे किसान नेता : धरना प्रदर्षन के अन्तिम दिन किसान नेताओं ने किसानों को संबोधित किया और एकजुटता का संदेश दिया। किसान महापंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट, प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रोहिताश बोहरा, सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास, जिला अध्यक्ष बाबूलाल चौधरी, तहसील अध्यक्ष हरसहाय तंवर, रामभरोस यादव मुंडावर तहसील अध्यक्ष, महेश जाखड़ प्रदेश मंत्री, किसान नेता राकेश रावत, सुभाष यादव, सहमाल गुर्जर, संदीप यादव, बीना शर्मा, सुभाष गुर्जर, प्रदीप चौधरी आदि नेताओं ने एक सुर में जान देंगे, जमीन नहीं देंगे के नारे को दोहराते हुये कहा कि उपजाऊ जमीनों का जबरन अधिग्रहण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जायेगा।
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