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राजस्थान: पंडित राजकुमार शर्मा ने पीताम्बरा पीठ में की विशेष पूजा, राष्ट्र कल्याण की करी कामना
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संक्षेप
राजस्थान: टोंक सद्गुरु आश्रम टोंक के संस्थापक, प्रख्यात ज्योतिषाचार्य एवं सनातन धर्म प्रचारक गुरुदेव पंडित राजकुमार शर्मा ने मध्यप्रदेश के दतिया स्थित सिद्ध शक्तिपीठ पीताम्बरा पीठ माँ बगलामुखी मंदिर तथा ग्वालियर के डबरा स्थित प्रसिद्ध नवग्रह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि, अखंडता, सांस्कृतिक उन्नति और विश्व कल्याण की कामना की।
विस्तार
राजस्थान: टोंक सद्गुरु आश्रम टोंक के संस्थापक, प्रख्यात ज्योतिषाचार्य एवं सनातन धर्म प्रचारक गुरुदेव पंडित राजकुमार शर्मा ने मध्यप्रदेश के दतिया स्थित सिद्ध शक्तिपीठ पीताम्बरा पीठ माँ बगलामुखी मंदिर तथा ग्वालियर के डबरा स्थित प्रसिद्ध नवग्रह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि, अखंडता, सांस्कृतिक उन्नति और विश्व कल्याण की कामना की। गुरुदेव ने दतिया स्थित माँ बगलामुखी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हुए भारत की प्रगति, सामाजिक समरसता और मानवता के कल्याण के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि माँ बगलामुखी धर्म की रक्षा करने वाली, अधर्म का नाश करने वाली तथा भक्तों को साहस, शक्ति और विजय प्रदान करने वाली आदिशक्ति हैं। वर्ष 1935 में स्थापित यह शक्तिपीठ आज देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसके बाद गुरुदेव ने डबरा स्थित एशिया के प्रसिद्ध नवग्रह मंदिर में नवग्रह देवताओं के समक्ष विशेष अनुष्ठान संपन्न किया। लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में फैले इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां नवग्रह देवताओं के साथ उनकी पत्नियां भी विराजमान हैं। उन्होंने देश में शांति, सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और जनकल्याण की मंगलकामना करते हुए नवग्रहों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर पंडित राजकुमार शर्मा ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता को “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश देने वाली जीवन शैली है। भारत की ऋषि परंपरा, वेदों का ज्ञान और संत-महात्माओं का त्याग ही भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान है। यही आध्यात्मिक विरासत भारत को विश्व में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे भारतीय संस्कृति, संस्कारों और आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रभक्ति और नैतिक मूल्यों का समन्वय ही आत्मनिर्भर, समृद्ध और शक्तिशाली भारत के निर्माण का आधार है। गुरुदेव ने कहा कि भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण हेतु एकजुट होकर कार्य करना होगा। अंत में उन्होंने सम्पूर्ण विश्व में शांति, सद्भाव, धर्म, करुणा और मानवता के प्रसार की प्रार्थना करते हुए भारत के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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