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राजस्थान: सफलतापूर्वक संपन्न हुआ दो दिवसीय गुर्जर शिक्षाविद् सम्मेलन
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संक्षेप
राजस्थान: कोटपूतली राजधानी जयपुर के राजस्थान विष्वविद्यालय स्थित देराश्री शिक्षक सदन में आयोजित दो दिवसीय गुर्जर शिक्षाविद् सम्मेलन उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
विस्तार
राजस्थान: कोटपूतली राजधानी जयपुर के राजस्थान विष्वविद्यालय स्थित देराश्री शिक्षक सदन में आयोजित दो दिवसीय गुर्जर शिक्षाविद् सम्मेलन उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन के संयोजक प्रो. जगराम गुर्जर ने बताया कि इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों, प्रोफेसरों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों तथा समाज चिंतकों ने भाग लेकर शिक्षा, इतिहास, संस्कृति, सामाजिक विकास तथा नई पीढ़ी की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया। दो दिवसीय इस सम्मेलन में पूर्व न्यायाधीश वी.एस. सराधना तथा सांसद के पूर्व संयुक्त सचिव डॉ. सत्यप्रकाश खटाना ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई। सम्मेलन के दौरान पद्मश्री एवं पूर्व कृषि वैज्ञानिक प्रो. डी.आर. भूमला स्मृति व्याख्यान तथा प्रो. जगदीप एस. छोकर स्मृति व्याख्यान आयोजित किए गए। प्रो. डी.आर. भूमला की पुत्री डॉ. प्रमिला बजाड़ ने प्रो. डी.आर. भूमला स्मृति व्याख्यान प्रस्तुत किया, जबकि वरिष्ठ समाजसेवी राजीव वर्मा ने प्रो. जगदीप एस. छोकर स्मृति व्याख्यान दिया। सम्मेलन में पूर्व न्यायाधीश वी.एस. सराधना, डॉ. सज्जन पोसवाल, डॉ. आर.के. गुर्जर, डॉ. प्रमिला बजाड़, डॉ. अंजू तवर, रामफूल गुर्जर (पीआरओ), पी.डी. कसाना, डॉ. मनोज, डॉ. सतपाल, राजीव वर्मा, हरिशंकर गुर्जर, डॉ. डी.के. गुर्जर, डॉ. सत्यनारायण, नाथूलाल, बचन सिंह, डॉ. भूमला, ब्रह्म सिंह, डॉ. पी.एस. वर्मा, डॉ. गोपाल, मोहनलाल वर्मा, डॉ. कुलदीप, प्रशांत गुर्जर, डॉ. नादान सिंह, डॉ. कैलाश, डॉ. नरेंद्र भड़ाना, राकेश राणा, डॉ. फूलचंद, डॉ. अंजू तथा डॉ. देवेंद्र सहित अनेक वक्ताओं ने शिक्षा को समाज की प्रगति का मूल आधार बताते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने पर बल दिया। वक्ताओं ने गुर्जर समाज की गौरवशाली ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। विभिन्न सत्रों में शिक्षाविदों ने विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, अनुसंधान तथा राष्ट्र-निर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सम्मेलन के अंतिम दिन “जयपुर घोषणा-पत्र” जारी किया गया। घोषणा-पत्र में प्रतिवर्ष इस सम्मेलन का आयोजन करने, पुस्तकों के लेखन एवं प्रकाशन को प्रोत्साहित करने तथा शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। सम्मेलन का समापन समाज में शिक्षा, जागरूकता, एकता एवं सकारात्मक परिवर्तन लाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस सम्मेलन को ज्ञान-विमर्श, शैक्षिक उन्नयन एवं सामाजिक उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया और आगामी सम्मेलन ग्वालियर में आयोजित करने का निर्णय किया गया।
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