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गुजरात: अबासणा गांव के सरकारी तालाब पर अतिक्रमण का आरोप, जांच और कार्रवाई की मांग

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गुजरात  Published by: Babubhai Sagthaji Thakor , Date: 08/06/2026 02:11:49 pm Share:
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  • Published by: Babubhai Sagthaji Thakor ,
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  • 08/06/2026 02:11:49 pm
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संक्षेप

गुजरात: भाभर बनासकांठा बनासकांठा जिले के भाभर तहसील अंतर्गत स्थित ग्राम अबासणा में सरकारी तालाब एवं पड़तर भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है।

विस्तार

गुजरात: भाभर बनासकांठा बनासकांठा जिले के भाभर तहसील अंतर्गत स्थित ग्राम अबासणा में सरकारी तालाब एवं पड़तर भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। गांव के निवासी एवं भारत निविदा लाइन समाचार राष्ट्रीय हिंदी न्यूज के जिला प्रभारी बाबूजी सगथाजी ठाकोर ने प्रशासन को आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा अतिक्रमण हटाने की मांग की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव की जीवनरेखा माने जाने वाले सरकारी सर्वे नंबर 54 स्थित तालाब एवं उसकी पाल पर कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण कर कच्चे और पक्के निर्माण किए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी भूमि पर आवासीय और पशुपालन संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है और तालाब का मूल स्वरूप प्रभावित हो रहा है।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पुराने सर्वे रिकॉर्ड में तालाब का क्षेत्रफल 6.21 एकड़ दर्ज था, जबकि नए सर्वे रिकॉर्ड में क्षेत्रफल 2-66-27 दर्शाया गया है। क्षेत्रफल में इस कथित विसंगति को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं और राजस्व विभाग से जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार जल संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से तालाबों के विकास पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन यदि तालाबों और उनकी पाल पर अतिक्रमण होता है तो इससे सरकारी योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित होता है। बताया जा रहा है कि तालाब की पाल के समीप कच्चे-पक्के निर्माण किए गए हैं और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।


स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि पूर्व पंचायत कार्यकाल के दौरान विकास कार्यों एवं वित्तीय लेन-देन में अनियमितताएं हुई हो सकती हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि पंचायत से जुड़े सभी विकास कार्यों और खर्चों की भी जांच कराई जाए, जिससे सच्चाई सामने आ सके। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो भविष्य में वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर जनहित के मुद्दे पर कितनी शीघ्रता से संज्ञान लेकर जांच शुरू करता है और सरकारी भूमि एवं तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए क्या कदम उठाता है।