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गुजरात: सूखे से प्रभावित किसानों का फसल ऋण माफ करने की करी गई मांग, न्याय एवं अधिकार समिति सरकार को सौंपेगी ज्ञापन
- Photo by : social media
विस्तार
गुजरात: राज्य में अपर्याप्त बारिश के कारण किसानों की फसलें बर्बाद होने से कृषि संकट गहराता जा रहा है। जामनगर, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर और कच्छ सहित कई जिलों में कम बारिश का असर खेती पर पड़ा है। इससे किसान आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। न्याय एवं अधिकार समिति के प्रदेश अध्यक्ष परसोतंभी एन. मुंगरा (पटेल) ने गुजरात सरकार से प्रभावित किसानों के फसल ऋण माफ करने और पशुपालकों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की मांग की है। परसोतंभी एन. मुंगरा ने कहा कि बारिश की कमी के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ है। फसलें बर्बाद होने से किसान बीज, खाद और मजदूरों की मजदूरी का भुगतान करने में भी असमर्थ हैं। किसानों ने अपनी समस्याओं और मांगों को मीडिया, विपक्षी नेताओं, किसान संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों तथा ग्रामीण किसान नेताओं के माध्यम से सरकार और जिला प्रशासन तक पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार ने प्रभावित चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करते हुए किसानों के लिए सहायता की घोषणा की है। इसके तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये और अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए 17,000 रुपये तक की सहायता देने की बात कही गई है। हालांकि, किसानों का कहना है कि यह राशि उनके नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। उनकी प्रमुख मांग है कि जिन किसानों ने फसल ऋण लिया है, उन्हें राहत देते हुए कर्ज माफ किया जाए। समिति के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल और कृषि मंत्री जीतूभाई वाघानी को किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने पशुपालकों के लिए घोषित 80 रुपये प्रति पशु प्रतिदिन की सहायता को भी अपर्याप्त बताया। उनके अनुसार, पशुधन को बचाने और चारे-पानी सहित अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए प्रति पशु प्रतिदिन 300 रुपये की सहायता दी जानी चाहिए। न्याय एवं अधिकार समिति ने गुजरात सरकार से मौजूदा सहायता योजना पर पुनर्विचार करने, किसानों की मांगों को स्वीकार करने और नई राहत संबंधी अधिसूचना जारी करने की अपील की है। समिति ने कहा कि इस मामले में गुजरात सरकार, कृषि विभाग और संबंधित जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर किसानों तथा पशुपालकों को उचित राहत देने की मांग की जाएगी।
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