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मध्य प्रदेश: विश्व नवकार दिवस पर नवकार मंत्र से शांति और सकारात्मक ऊर्जा का दिया संदेश
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: आज पूरा विश्व अशांति, वैचारिक मतभेद और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में 9 अप्रैल का दिन 'विश्व नवकार दिवस' के रूप में हमें उस महामंत्र की याद दिलाता है, जो केवल जैन धर्म की विरासत नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: आज पूरा विश्व अशांति, वैचारिक मतभेद और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में 9 अप्रैल का दिन 'विश्व नवकार दिवस' के रूप में हमें उस महामंत्र की याद दिलाता है, जो केवल जैन धर्म की विरासत नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग है। नवकार मंत्र एक ऐसा आध्यात्मिक सुरक्षा कवच है, जो आत्मा को विकारों से बचाकर परमात्मा बनने की शक्ति प्रदान करता है।नवकार मंत्र अनादि और अनंत है। इसकी विलक्षणता यह है कि इसमें किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि 'गुणों' की वंदना की गई है। जब हम 'णमो अरिहंताणं' से 'णमो लोए सव्वसाहूणं' तक का उच्चारण करते हैं, तो हम उन दिव्य गुणों को नमन करते हैं जिन्हें धारण कर कोई भी आत्मा मोक्ष की अधिकारी बन सकती है। यह मंत्र हमें सिखाता है कि पद और पंथ से ऊपर उठकर गुणों का सम्मान करना ही सच्ची मानवता है। दादा गुरुदेव की तपोशक्ति और नवकार मोहनखेड़ा महातीर्थ की पवित्र माटी साक्षय है कि हमारे आराध्य, युगप्रधान दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहेब ने अपने जीवन के हर कठिन क्षण में इसी महामंत्र को अपना आधार बनाया। उन्होंने 'क्रियोद्धार' के माध्यम से समाज में जो नई चेतना फूंकी और 'अभिधान राजेन्द्र कोष' जैसे कालजयी ग्रंथ की रचना की, वह नवकार की ही मंत्र-शक्ति का परिणाम था। गुरुदेव कहते थे कि यदि हृदय में नवकार का वास है, तो हताशा और निराशा कभी जीवन के द्वार पर दस्तक नहीं दे सकती।आज का विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि मंत्रों की विशिष्ट ध्वनियाँ हमारे शरीर के चक्रों और मस्तिष्क की कोशिकाओं पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। नवकार मंत्र की नौ पद वाली संरचना हमारे भीतर के नकारात्मक विचारों को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। यह 'सव्वपावप्पणासणो' है, अर्थात यह मानसिक और आध्यात्मिक पापों का नाश करने वाला है। मुनि श्री पीयूष चंद्र विजय जी के अनुसार, 'विश्व नवकार दिवस' मनाने की सार्थकता तभी है जब हम इस मंत्र के सार—मैत्री और करुणा—को अपने आचरण में उतारें। यह मंत्र हमें संदेश देता है कि 'पढमं हवई मंगलं' यानी सबसे पहला मंगल अपने मन को शुद्ध करना है। यदि मन शुद्ध है, तो पूरा संसार मंगलमय हो जाएगा। आज इस पावन अवसर पर, आइए हम सब संकल्प लें कि प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक नवकार महामंत्र का जाप करेंगे। मोहनखेड़ा तीर्थ की पावन धरा से यही मंगल कामना है कि नवकार की यह दिव्य गूँज विश्व में सुख, शांति और सद्भावना का विस्तार करे।
विश्व शांति का आह्वान
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