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मध्य प्रदेश: CM हेल्पलाइन में लंबित शिकायतों पर सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील

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मध्य प्रदेश  Published by: Kamal Patni , Date: 05/03/2026 12:17:25 pm Share:
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: सुशासन और पारदर्शिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्थापित CM Helpline नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

विस्तार

मध्य प्रदेश: सुशासन और पारदर्शिता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्थापित CM Helpline नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। किंतु विगत वर्षों में अनेक शिकायतकर्ताओं का अनुभव यह दर्शाता है कि कई मामलों में शिकायतों का वास्तविक समाधान किए बिना “निराकृत” दर्ज कर दिया जाता है। विशेष रूप से गंभीर स्थिति तब उत्पन्न होती है जब शिकायतें 2–3 वर्ष तक लंबित रहने के बाद भी केवल यह टिप्पणी दर्ज कर दी जाती है — “शिकायत का अवलोकन कर निराकरण किया जाएगा।” ऐसी औपचारिक टिप्पणी न तो समाधान है, न ही प्रशासनिक उत्तरदायित्व का निर्वहन। बिना स्थायी समाधान “निराकृत” दर्ज करना। लंबी अवधि तक लंबित रखकर औपचारिक जवाब देना। गलत या अपूर्ण निराकरण पर किसी अधिकारी की जवाबदेही तय न होना। शिकायतकर्ता की संतुष्टि को महत्व न देना। यह स्थिति शिकायत निवारण प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है।

 

लोकतांत्रिक शासन में शिकायत तंत्र केवल डेटा प्रबंधन का माध्यम नहीं, बल्कि जनविश्वास की आधारशिला होता है। यदि वर्षों बाद भी “अवलोकन किया जाएगा” जैसी टिप्पणी ही अंतिम उत्तर हो, तो इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना जाना चाहिए। 6 माह से अधिक लंबित सभी शिकायतों की उच्च स्तरीय समीक्षा की जाए। 1 वर्ष से अधिक लंबित मामलों का विशेष प्रशासनिक ऑडिट कराया जाए। गलत/अपूर्ण निराकरण सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाए। प्रत्येक निराकरण के साथ जमीनी अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य की जाए। शिकायतकर्ता की संतुष्टि को मूल्यांकन का प्रमुख मानदंड बनाया जाए। मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने के लिए आवश्यक है कि शिकायत निवारण प्रक्रिया में वास्तविक सुधार हो। सुशासन का अर्थ केवल पोर्टल पर शिकायत बंद करना नहीं, बल्कि समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। जनहित में यह अपेक्षा की जाती है कि शासन स्तर पर इस विषय को गंभीरता से लिया जाएगा और ठोस कदम उठाए जाएंगे।