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मध्य प्रदेश: पारिवारिक बंटवारे के मकान के हिस्सों को अलग प्लॉट न मानने पर हुआ विवाद

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मध्य प्रदेश  Published by: Kamal Patni , Date: 29/01/2026 11:23:58 am Share:
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  • 29/01/2026 11:23:58 am
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: वर्षों में सामान्य प्रशासन विभाग एवं नगरीय प्रशासन विभाग की संयुक्त कार्यशैली ने आम नागरिकों को एक ऐसे प्रशासनिक भ्रम में डाल दिया है, जहाँ कानून, संविधान और व्यवहारिक जीवन—तीनों अलग-अलग दिशाओं में खड़े दिखाई देते हैं।

विस्तार

मध्य प्रदेश: वर्षों में सामान्य प्रशासन विभाग एवं नगरीय प्रशासन विभाग की संयुक्त कार्यशैली ने आम नागरिकों को एक ऐसे प्रशासनिक भ्रम में डाल दिया है, जहाँ कानून, संविधान और व्यवहारिक जीवन—तीनों अलग-अलग दिशाओं में खड़े दिखाई देते हैं। ताज़ा उदाहरण है पिता की मृत्यु के बाद पारिवारिक बँटवारे से प्राप्त मकान का हिस्सा भी अब “विभाजित प्लॉट” माना जा रहा है। पारिवारिक बँटवारे (Family Settlement / Partition) के माध्यम से, जब पिता की मृत्यु के बाद कानूनी उत्तराधिकारियों को मकान के अलग-अलग हिस्से प्राप्त होते हैं। 
तो यह स्वामित्व का वैध, मान्य और स्थायी अधिकार होता है, लेकिन नगरीय प्रशासन अब यह कह रहा है कि ऐसे हिस्से अलग प्लॉट नहीं माने जाएँगे। बैंक व्यक्तिगत हिस्से पर होम लोन देने से मना कर देती है। क्योंकि उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act / Muslim Law / Indian Succession Act) अलग-अलग स्वामित्व को मान्यता देता है। संविधान का अनुच्छेद 300A संपत्ति के अधिकार की रक्षा करता है। अनुच्छेद 14 और 21 समानता और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देते हैं न तो उत्तराधिकार कानून को निष्प्रभावी कर सकता है न ही नागरिक को संयुक्त स्वामित्व के लिए मजबूर कर सकता है।