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मध्य प्रदेश: ओडिशा हाईकोर्ट ने RTI ब्लैकलिस्टिंग आदेश को असंवैधानिक करार दिया
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: ओडिशा हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय और संविधान की स्पष्ट चेतावनी सूचना का अधिकार (RTI) कोई दया नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त लोकतांत्रिक हथियार है, जब-जब शासन या आयोग इस हथियार को कुंद करने की कोशिश करते हैं, तब-तब न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ा है।
विस्तार
मध्य प्रदेश: ओडिशा हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय और संविधान की स्पष्ट चेतावनी सूचना का अधिकार (RTI) कोई दया नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त लोकतांत्रिक हथियार है, जब-जब शासन या आयोग इस हथियार को कुंद करने की कोशिश करते हैं, तब-तब न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ा है। ओडिशा हाईकोर्ट का 21 मार्च 2024 का निर्णय इसी संवैधानिक परंपरा की एक मजबूत कड़ी है। ओडिशा राज्य सूचना आयोग ने एक RTI आवेदक को यह कहकर भविष्य में RTI आवेदन करने से रोक दिया, कि वह बार-बार आवेदन देकर सरकारी तंत्र को परेशान कर रहा है और RTI का “दुरुपयोग” कर रहा है।
यह आदेश न केवल चौंकाने वाला था, बल्कि कानून की आत्मा के विरुद्ध भी था। हाईकोर्ट का स्पष्ट और साहसिक फैसला। ओडिशा हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस आदेश को अवैध, असंवैधानिक और अधिकार क्षेत्र से बाहर (Without Jurisdiction) घोषित करते हुए रद्द कर दिया। सूचना का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है। सूचना आयोग के पास किसी नागरिक को भविष्य में RTI लगाने से रोकने की शक्ति नहीं है। RTI अधिनियम, 2005 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो ब्लैकलिस्टिंग की अनुमति देता हो। संवैधानिक दृष्टि से यह निर्णय क्यों महत्वपूर्ण है?
RTI सीधे-सीधे जुड़ा है।
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