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राजस्थान: नगर परिषद चुनाव में टिकट को लेकर हुआ घमासान, भाजपा-कांग्रेस में बगावत के सुर हुए तेज
- Photo by : social media
विस्तार
राजस्थान: टोंक नगर परिषद चुनाव में नामांकन के अंतिम दिन शहर की सियासत गरमा गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में टिकट को लेकर कार्यकर्ताओं और दावेदारों की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। कहीं स्थानीय दावेदारों को टिकट नहीं मिलने का विरोध है तो कहीं जातिगत समीकरणों को लेकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे हैं। भाजपा में सबसे ज्यादा चर्चा नगर परिषद के वार्ड 49 को लेकर है। भाजपा जिला मंत्री नीलिमा आमेरा यहां से टिकट की दावेदार हैं। उनका कहना है कि वार्ड सामान्य महिला के लिए आरक्षित है, इसके बावजूद जातिगत समीकरणों के आधार पर किसी अन्य जाति या समुदाय के प्रत्याशी को टिकट दिए जाने की चर्चा से वह नाराज हैं। नीलिमा आमेरा ने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की है और भाजपा से इस्तीफा देने की बात भी कही है। वहीं, नगर परिषद के 60 वार्डों में भाजपा ने 52 वार्डों में ही अधिकृत प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। आठ वार्डों में पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं है। ऐसे में इन वार्डों में भाजपा की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा तेज है। भाजपा के लिए यह चुनाव राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदेश में पार्टी की सरकार होने के साथ ही नगर परिषद में सभापति पद को लेकर भी दावेदारों की नजरें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं। सभापति पद की दावेदारी के लिए पहले पार्षद का चुनाव जीतना जरूरी है। ऐसे में टिकट की लड़ाई सिर्फ पार्षद बनने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे सभापति पद की राजनीतिक तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस में भी टिकट वितरण को लेकर असंतोष सामने आया है। वार्ड 52 से जावेद इकबाल ने टिकट के लिए आवेदन किया था। वहीं, स्थानीय दावेदारों को दरकिनार कर बाहरी व्यक्ति को टिकट दिए जाने के आरोप को लेकर जाकिर ने नाराजगी जताई है। अब दोनों प्रमुख दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने नाराज कार्यकर्ताओं और दावेदारों को संभालने की है। नामांकन दाखिल करने का आज अंतिम दिन है और दोपहर 3 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकते हैं। जिला कलेक्टर टीना डाबी के अनुसार, निर्धारित समय तक नामांकन स्थल पर पहुंचने वाले प्रत्याशी का नामांकन दाखिल कराया जा सकता है। ऐसे में अगले कुछ घंटे टोंक की चुनावी राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं। टिकट से नाराज दावेदार पार्टी के साथ रहते हैं या निर्दलीय मैदान में उतरते हैं, यह तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद साफ होगी। टोंक नगर परिषद चुनाव में टिकट की लड़ाई अब स्थानीय बनाम बाहरी, जातिगत समीकरण और पार्टी के भीतर प्रभाव का मुद्दा बनती दिखाई दे रही है। अब देखना होगा कि भाजपा और कांग्रेस अपने नाराज दावेदारों को मनाने में कितनी सफल होती हैं या फिर यह नाराजगी चुनाव मैदान में बगावत का रूप लेकर दोनों दलों के समीकरण प्रभावित करती है।