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उत्तर प्रदेश: रक्षाबंधन पर सजे रिश्तों के रंग, राखी की डोर में बंधा भाई-बहन का अटूट प्रेम और विश्वास
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विस्तार
उत्तर प्रदेश: रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। कलाई पर बंधी राखी भले ही एक साधारण धागा हो, लेकिन इससे जुड़ी भावनाएं रिश्तों को मजबूत करने का संदेश देती हैं। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती है, जबकि भाई बहन की रक्षा और हर सुख-दुख में साथ निभाने का संकल्प लेता है। इस बार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा।ज्योतिषाचार्य पंडित विवेक तिवारी के अनुसार, रक्षाबंधन की परंपरा में रक्षा सूत्र का विशेष महत्व माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार देवासुर संग्राम के दौरान जब देवराज इंद्र संकट में थे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने भगवान की आराधना कर सिद्ध रक्षा सूत्र प्राप्त किया और उसे इंद्र की कलाई पर बांधा। इसके बाद इंद्र को विजय प्राप्त हुई। तभी से रक्षा सूत्र को संकट से रक्षा और मंगल की कामना से जोड़कर देखा जाता है। पंडित विवेक तिवारी ने बताया कि रक्षाबंधन का मूल भाव रक्षा, प्रेम और विश्वास है। रक्षा सूत्र केवल कलाई पर बांधा जाने वाला धागा नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी और हर परिस्थिति में साथ निभाने का संकल्प है। धार्मिक परंपराओं में भी रक्षा सूत्र के महत्व का उल्लेख मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण और धर्मराज युधिष्ठिर से जुड़ी कथाओं में भी इसे संकट के समय सुरक्षा और विजय की कामना से जोड़ा गया है। रक्षाबंधन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों में मुगल सम्राट हुमायूं और मेवाड़ की रानी कर्णावती की कथा का भी उल्लेख मिलता है। संकट के समय राखी भेजे जाने और उसके सम्मान में सहायता के लिए आगे बढ़ने की यह कथा लंबे समय से लोकचर्चा में रही है। ऐसे प्रसंगों ने राखी को विश्वास, सम्मान और मानवीय रिश्तों के प्रतीक के रूप में स्थापित करने में भूमिका निभाई। रक्षाबंधन के दिन घरों में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहता है। बहनें भाई की आरती उतारकर माथे पर तिलक लगाती हैं और उसकी कलाई पर राखी बांधकर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी बहन को उपहार देकर अपने स्नेह का इजहार करता है। दूर रहने वाले भाई-बहन फोन, वीडियो कॉल और संदेशों के जरिए एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देते हैं। बदलते दौर में रक्षाबंधन मनाने के तौर-तरीकों में भले ही बदलाव आया हो, लेकिन राखी से जुड़ी भावनाएं आज भी कायम हैं। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे का साथ निभाने के संकल्प को और मजबूत करने का अवसर देता है।
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