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उत्तर प्रदेश: निःशुल्क बोरिंग योजना में भ्रष्टाचार, जनजातीय किसानों से वसूले गए हजारों रुपये 

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उत्तर प्रदेश   Published by: Indresh Kumar Pandey , Date: 30/01/2026 11:46:04 am Share:
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  • Date:
  • 30/01/2026 11:46:04 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: सरकार की जनजातीय और गरीब किसानों के लिए चलाई जा रही निःशुल्क बोरिंग योजना सोनभद्र में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: सरकार की जनजातीय और गरीब किसानों के लिए चलाई जा रही निःशुल्क बोरिंग योजना सोनभद्र में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। लघु सिंचाई विभाग में एक्सियन, जेई और दलालों की संगठित तिकड़ी ने इस योजना को खुलेआम वसूली उद्योग में बदल दिया है। जिलाधिकारी सोनभद्र को सौंपे गए शिकायती पत्र में जगदीश प्रसाद (निवासी ग्राम रोरवा, ब्लाक कोन) ने सनसनीखेज आरोप लगाए हैं कि ग्राम पंचायत पड़रछ (टोला मदरिया, पिपरहवा, सदुआरी) में गरीब और जनजातीय लाभार्थियों से जबरन हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि शासनादेश स्पष्ट है कि यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है। 100 फीट का बोर, लेकिन वसूली हजारों में शिकायत के अनुसार ब्लाक चोपन क्षेत्र में मात्र 100 फीट गहराई का 5 इंच बोर कराया जा रहा है, लेकिन इसके बदले प्रति लाभार्थी से 7 हजार से 26 हजार रुपये तक की उगाही की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ विभागीय अधिकारियों की जानकारी और संरक्षण में हो रहा है।


दलाल के जरिए चल रहा पूरा नेटवर्क। इस पूरे खेल का संचालन कुरवा निवासी एक दलाल के माध्यम से किया जा रहा है। आरोप है कि तपतीश पुत्र ओहाब नामक व्यक्ति ग्रामीणों से पैसे वसूलता है और उसे संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाता है। अब तक करीब 50 बोरिंग कराई जा चुकी हैं, जिनसे लाखों रुपये की अवैध वसूली हो चुकी है। पीड़ित ग्रामीणों के खुलासे ग्रामीणों ने खुलकर आरोप लगाए हैं। जीतलाल पुत्र अयोध्या (पिपरहवा, पड़रछ) से 26,000 रुपये, सावित्री देवी से 10,000 रुपये, वेदप्रकाश से 15,000 रुपये जबरन वसूले गए। ग्रामीणों का कहना है कि पैसे न देने पर उन्हें बोरिंग न कराने, फाइल रोकने और योजना से बाहर करने की धमकी दी जाती है।

 

सवाल यह है कि जब योजना निःशुल्क है, तो यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है। शासनादेश की खुलेआम धज्जियां। यह मामला केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि शासन की मंशा, जनजातीय अधिकारों और गरीबों की आजीविका पर सीधा हमला है। लघु सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी न सिर्फ आंख मूंदे बैठे हैं, बल्कि आरोप है कि वे इस पूरे खेल के मुख्य हिस्सेदार हैं। प्रशासन के सामने बड़ा सवाल क्या जिलाधिकारी सोनभद्र इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएंगे? क्या एक्सियन, जेई और दलाल पर एफआईआर दर्ज होगी या फिर यह मामला भी अन्य भ्रष्टाचारों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा? पीड़ित ग्रामीणों को न्याय और शासन की साख बचाने के लिए तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।