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उत्तर प्रदेश: अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जयंती पर माल्यार्पण, जन्मस्थली की उपेक्षा पर उठे सवाल
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: हिंदी खड़ी बोली के जनक और कवि सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जी की जयंती के अवसर पर निजामाबाद में श्रद्धापूर्वक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बाबू केदारनाथ स्मारक जन सेवा संस्थान द्वारा संचालित भगत सिंह खेल अकादमी के खिलाड़ियों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: हिंदी खड़ी बोली के जनक और कवि सम्राट अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जी की जयंती के अवसर पर निजामाबाद में श्रद्धापूर्वक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बाबू केदारनाथ स्मारक जन सेवा संस्थान द्वारा संचालित भगत सिंह खेल अकादमी के खिलाड़ियों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम का नेतृत्व संस्थापक एवं राष्ट्रीय पहलवान अमरजीत यादव ने किया। उन्होंने हरिऔध जी की साहित्यिक कृतियों को याद करते हुए कहा कि जिन्होंने पूरे देश में निजामाबाद को पहचान दिलाई, आज उसी महान व्यक्तित्व को स्थानीय स्तर पर भुला दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि हरिऔध जी की प्रसिद्ध कृति ‘प्रिय प्रवास’ ने हिंदी खड़ी बोली को एक नई दिशा दी और देश को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया। इसके बावजूद नगर पंचायत में उनके नाम पर न तो कोई स्मारक है और न ही पुस्तकालय, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कार्यक्रम में मौजूद अरविंद यादव ने भी जन्मस्थली की बदहाल स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि हरिऔध जी ने आजमगढ़ को राष्ट्रीय पहचान दिलाई, इसलिए उनकी जन्मस्थली पर एक पुस्तकालय का निर्माण अत्यंत आवश्यक है, ताकि साहित्य प्रेमी वहां आकर उनकी कृतियों को समझ सकें। इस अवसर पर डॉ. आदित्य सिंह, शेरू सोनकर सहित अकादमी के खिलाड़ी एवं अन्य सम्मानित सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से महान साहित्यकार को श्रद्धांजलि देने के साथ ही उनकी विरासत को सहेजने की मांग भी जोर पकड़ती नजर आई।
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