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उत्तर प्रदेश: प्रदेश दिवस पर ब्लैकआउट मॉकड्रिल का सफल हुआ आयोजन
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सहारनपुर दिवस के गौरवमयी अवसर पर सहारनपुर की सड़कों पर आज एक असाधारण दृश्य देखने को मिला।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सहारनपुर दिवस के गौरवमयी अवसर पर सहारनपुर की सड़कों पर आज एक असाधारण दृश्य देखने को मिला। श्री रामकिशन परमहंस स्कूल तिराहे से जैन बाग तक का इलाका मानो किसी 'वॉर ज़ोन' में तब्दील हो गया था, जहाँ नागरिक सुरक्षा के जांबाजों ने अपनी मुस्तैदी से यह साबित किया कि आपदा चाहे कितनी भी बड़ी हो, सहारनपुर सुरक्षित है। प्रमुख सचिव, नागरिक सुरक्षा अनुभाग, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार 'उत्तर प्रदेश दिवस-2026' एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी की जयंती के पावन अवसर पर आज सहारनपुर सहित प्रदेश के सभी 75 जनपदों में एक साथ 'ब्लैक आउट मॉकड्रिल' का सफल आयोजन किया गया। जिलाधिकारी/नियन्त्रक नागरिक सुरक्षा, मनीष बंसल के कुशल निर्देशन और एडीएम प्रशासन सन्तोष बहादुर सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस अभ्यास ने आपातकालीन स्थितियों में विभाग की तैयारियों को बखूबी प्रदर्शित किया। नागरिक सुरक्षा के वार्डन्स ने हाथों में लाल झंडियां और टॉर्च लेकर मोर्चा संभाला और सड़कों पर चल रहे लोगों को तुरंत सेल्टर लेने या जमीन पर लेटने (Lie Down) के निर्देश दिए। काल्पनिक हमले में एक इमारत के मलबे में तब्दील होने का दृश्य तैयार किया गया। लोक निर्माण विभाग (PWD) की भारी मशीनों और नागरिक सुरक्षा की 'रेस्क्यू पार्टी' ने मलबे के बीच से घायलों को निकालने का जोखिम भरा अभियान चलाया। सीढ़ियों और रस्सियों के सहारे ऊँची मंजिलों पर फंसे नागरिकों को 'स्लाइडिंग' तकनीक से नीचे उतारा गया, जो रोंगटे खड़े कर देने वाला दृश्य था। हमले के बाद लगी भीषण आग को बुझाने के लिए मुख्य अग्नि शमन अधिकारी श्री प्रताप सिंह के नेतृत्व में फायर ब्रिगेड और स्टार पेपर मिल की फायर टीम ने मोर्चा संभाला। पानी की बौछारों और अत्याधुनिक उपकरणों के जरिए मिनटों में 'आग' पर काबू पा लिया गया, जिससे आसपास की संपत्तियों को जलने से बचा लिया गया। मलबे से निकाले गए घायलों के लिए स्वास्थ्य विभाग और सिविल डिफेंस की मेडिकल टीम ने 'ट्राइएज एरिया' (Triage Area) बनाया। जहाँ सहायक उपनियन्त्रक श्री दिनेश कुमार की टीम ने घायलों को उनकी चोट के अनुसार वर्गीकृत किया। किसी की पट्टी की गई, तो किसी को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। गंभीर रूप से घायल डमी और वालंटियर्स को 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाकर तत्काल एम्बुलेंस के माध्यम से जिला अस्पताल रवाना किया गया। सात मिनट के इस रोमांचक और चुनौतीपूर्ण अभ्यास के बाद 'ऑल क्लियर' (खतरा समाप्ति) का सायरन एक सुर में बजा। बिजली बहाल की गई और शहर ने फिर से राहत की सांस ली। यह प्रदर्शन इतना वास्तविक था कि वहां मौजूद जनता ने तालियों के साथ नागरिक सुरक्षा टीम का उत्साहवर्धन किया। संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन और आपदा प्रबंधन का प्रदर्शन बेहतरीन रहा साथ ही मॉकड्रिल के दौरान विभिन्न विभागों ने आपसी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया।
सायरन की गूंज और अभेद्य सुरक्षा घेरा सांय 06:00 बजे जैसे ही क्षेत्रीय नियन्त्रण केन्द्र दिल्ली से काल्पनिक हवाई हमले की सूचना प्राप्त हुई, नागरिक सुरक्षा नियन्त्रण केन्द्र सहारनपुर द्वारा तत्काल सायरन के माध्यम से जनता को सचेत किया गया। दो मिनट तक उतार-चढ़ाव वाली सायरन की आवाज (Wailing Tone) गूंजते ही सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विद्युत विभाग ने बिजली आपूर्ति बाधित कर दी, जिससे चयनित क्षेत्र (रामकिशन परमहंस स्कूल तिराहा से जैन बाग) पूरी तरह अंधेरे (ब्लैक आउट) की आगोश में समा गया। नागरिक सुरक्षा के पदाधिकारियों ने लाल झंडी दिखाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने हेतु निर्देशित किया। ठीक 06:07 बजे 'खतरा समाप्ति' का सायरन बजते ही सभी आपातकालीन सेवाएं युद्धस्तर पर सक्रिय हो गईं, जैसे ही क्षेत्रीय नियन्त्रण केन्द्र दिल्ली से 'हवाई हमले' का सिग्नल प्राप्त हुआ, पूरा क्षेत्र सायरन की डरावनी लेकिन सतर्क करने वाली आवाजों से गूंज उठा। जिलाधिकारी मनीष बंसल के निर्देश पर पलक झपकते ही विद्युत आपूर्ति काट दी गई। पूरा इलाका 'टोटल ब्लैक-आउट' की स्थिति में आ गया।
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