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उत्तर प्रदेश: रोजी-रोटी बचाने की लड़ाई हुई तेज, वेंडरों ने प्रशासन को चेताया

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उत्तर प्रदेश  Published by: Indresh Kumar Pandey , Date: 03/06/2026 04:00:46 pm Share:
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  • 03/06/2026 04:00:46 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: वाराणसी रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता प्रो. संदीप पांडेय के नेतृत्व में स्ट्रीट वेंडरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त एवं टाउन वेंडिंग कमेटी के अध्यक्ष हिमांशु नागपाल से मुलाकात कर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: वाराणसी रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता प्रो. संदीप पांडेय के नेतृत्व में स्ट्रीट वेंडरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त एवं टाउन वेंडिंग कमेटी के अध्यक्ष हिमांशु नागपाल से मुलाकात कर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने लंका स्थित बीएचयू अस्पताल के बाहर वर्षों से व्यवसाय कर रहे स्ट्रीट वेंडरों को पुलिसिया कार्रवाई से संरक्षण देने तथा वेंडर कानून के तहत व्यवस्थित पुनर्वास की मांग उठाई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि बीएचयू अस्पताल के बाहर लंबे समय से चाय, दूध, नाश्ता और अन्य आवश्यक वस्तुएं बेचकर आजीविका चला रहे वेंडर मरीजों और उनके परिजनों को सुविधाएं उपलब्ध कराते रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए हटाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे उनके रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।

प्रो. संदीप पांडेय ने कहा कि वर्ष 2014 में लागू स्ट्रीट वेंडर अधिनियम का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार सर्वेक्षण, वेंडिंग प्रमाणपत्र और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी किए बिना किसी वेंडर को हटाया नहीं जा सकता। ऐसे में प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई कानून की भावना के विपरीत है। ज्ञापन में कहा गया कि क्षेत्र के अधिकांश वेंडर प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत ऋण प्राप्त कर चुके हैं और सरकार स्वयं उनके व्यवसाय को मान्यता दे चुकी है। ऐसे में उन्हें रोजगार से वंचित करना उचित नहीं है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जब तक वैकल्पिक एवं उपयुक्त वेंडिंग स्थल उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक वर्तमान वेंडरों को उनके स्थान पर व्यवसाय करने दिया जाए।

वेंडरों ने यह भी मांग की कि यदि वर्तमान स्थान से हटाना आवश्यक हो तो नगर निगम एवं प्रशासन द्वारा ऐसा वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए जहां उनका व्यवसाय सुचारू रूप से चल सके। साथ ही पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से लागू की जाए। प्रतिनिधिमंडल में चिंतामणि सेठ, प्रेम सोनकर, धनंजय, गोपाल सोनकर, महेंद्र गुप्ता, त्रिवेणी गुप्ता, मुन्नी देवी और मंगल मोदनवाल सहित अन्य वेंडर प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि गरीब वेंडरों के अधिकारों की अनदेखी जारी रही तो वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे।