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उत्तर प्रदेश: स्वर्ण समाज ने यूजीसी कानून के विरोध में डीएम को सौंपा ज्ञापन, कानून वापस लेने की मांग
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: सहारनपुर बुधवार दिनांक 28 जनवरी को स्वर्ण समाज के गणमान्य लोगों द्वारा जिलाधिकारी सहारनपुर को एक ज्ञापन यूजीसी कानून के संबंध में सौंपा गया, जिसमें उन्होंने यूजीसी कानून को वापस लेने के लिए लिखा।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सहारनपुर बुधवार दिनांक 28 जनवरी को स्वर्ण समाज के गणमान्य लोगों द्वारा जिलाधिकारी सहारनपुर को एक ज्ञापन यूजीसी कानून के संबंध में सौंपा गया, जिसमें उन्होंने यूजीसी कानून को वापस लेने के लिए लिखा। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार के उल्लंघन, हिंदू समाज को जाति के आधार पर विभाजित करने की राजनीतिक प्रवृत्ति, 2018 एस सी/एस टी एक्ट के दुरुपयोग,यू जी सी की स्वर्ण विरोधी नीतियों तथा प्रयागराज माघ मेला सहित देशभर में ब्राह्मण बटुकों एंव साधू संतों पर उत्तर प्रदेश पुलिस के द्वारा किए गए अत्याचारों के संबंध में माननीय प्रधानमंत्री जी। यह ज्ञापन स्वर्ण जाति की भावनात्मक प्रतिक्रिया नही, बल्कि संविधान सामाजिक संतुलन और राष्ट्र की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव के साथ साथ चेतावनी भी है। समस्त राजनीतिक दलों एंव आपकी सरकार की वर्तमान नीतियों से हिंदू समाज को लगातार जातियों में बांटा जा रहा है और सामाजिक न्याय के नाम पर एक ही समाज के भीतर वैमनस्य को संस्थागत रुप दिया जा रहा है। यह स्थिति संविधान की आत्मा के विपरीत है। यह कटु सत्य और तथ्यात्मक वास्तविकता है। वर्तमान में 13 जनवरी 2026 के यूजीसी एक्ट के माध्यम से स्वर्ण समाज के बच्चों के शैक्षणिक भविष्य पर सुनियोजित प्रहार किया जा रहा है। मेरिट योग्यता और प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर जन्म के आधार पर अवसर तय करने की व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे स्वर्ण जाति के बच्चों को उच्च शिक्षा, शोध और अकादमिक नेतृत्व से बाहर किया जा सके, जिस प्रकार 2018 के एस सी/एक्ट संशोधन के बाद से स्वर्ण समाज, खासकर ब्राह्मण समाज निरंतर भय, अपमान और कानूनी उत्पीड़न का शिकार है। झूठे मुकदमें, त्वरित गिरफ्तारी हो रही उसी प्रकार से इस यूजीसी एक्ट के बाद स्वर्ण समाज के बच्चों के साथ होगा। महोदय ये ना तो सामाजिक न्याय,बल्कि समानता के नाम पर स्वर्णों के संवैधानिक विश्वासघात है। प्रयागराज के पवित्र माघ मेले जैसे राष्ट्रीय एंव अध्यात्मिक आयोजन में ब्राह्मणों, पुजारियों एंव साधू संतों के साथ जो व्यवहार हुआ। वह राज्य सत्ता की असंवेदनशीलता और सनातन विरोधी दृष्टिकोण का प्रतीक है। संतो को हटाया गया, जिस प्रकार ब्राह्मण बटुकों की चोटी और वस्त्रों को फाडकर अपमानित किया गया और परंपरा को प्रशासनिक बल से कुचलने का प्रयास हुआ। यह सीधे तौर पर अनुच्छेद 25 और 14 दोनों का उल्लंघन है। इस घटना से देश में एक बार फिर जिस प्रकार मुगल शासन में ब्राह्मणों पर अत्याचार की याद दिला दी है। इस मौके पर सर्व स्वर्ण समाज ने मिलकर यूजीसी को काला कानून करार देते हुए इसे जल्द हटाने अर्थात वापस लेने की मांग उठाई। इस दौरान बहुसंख्यक नेताओं,गणमान्य वक्ताओं के साथ ब्राह्मण समाज के मंडल अध्यक्ष माननीय दिनेश शर्मा,वरिष्ठ नेता राहुल जी,मोनू शर्मा,संदीप शर्मा, सचिन कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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