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गुजरात: AI वॉइस क्लोनिंग फ्रॉड को लेकर साइबर एजेंसियों की चेतावनी, ठगी का नया खतरनाक तरीका सक्रिय
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संक्षेप
गुजरात: AI वॉइस क्लोनिंग फ्रॉड साइबर अपराधियों द्वारा ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका है, जिसमें Rajasthan Police और साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने जनता को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। इस घोटाले में जालसाज़ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके आपके किसी करीबी
विस्तार
गुजरात: AI वॉइस क्लोनिंग फ्रॉड साइबर अपराधियों द्वारा ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका है, जिसमें Rajasthan Police और साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने जनता को सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है। इस घोटाले में जालसाज़ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके आपके किसी करीबी (बच्चे, माता-पिता या मित्र) की हूबहू नकली आवाज़ (Voice Clone) तैयार करते हैं और आपातकालीन स्थिति का नाटक करके तुरंत पैसों की मांग करते हैं।यह फ्रॉड कैसे काम करता है, यह इतना खतरनाक क्यों है और इससे कैसे बचा जाए, इसका पूरा विवरण नीचे दिया गया है:ठगी का तरीका: यह कैसे काम करता है?आवाज़ का सैंपल चुराना: अपराधी सोशल मीडिया (जैसे Instagram Reels, Facebook या YouTube) पर पोस्ट किए गए आपके वीडियो या ऑडियो नोट से मात्र 3 सेकंड का ऑडियो सैंपल चुरा लेते हैं।AI टूल से क्लोनिंग: ElevenLabs जैसे आधुनिक AI वॉइस जनरेटर टूल्स की मदद से उस छोटे से सैंपल को हूबहू डिजिटल आवाज़ में बदल दिया जाता है। यह टूल व्यक्ति के बोलने के तरीके, पिच और टोन की नकल कर लेता है। इमोशनल ब्लैकमेल और कॉल: ठग पीड़ित के परिवार को कॉल करते हैं। कॉल पर रोने या घबराने की आवाज़ सुनाई देती है जो बिल्कुल उनके अपने बच्चे या रिश्तेदार जैसी होती है।फर्जी संकट की कहानी: अपराधी दावा करते हैं कि उनका एक्सीडेंट हो गया है, वे पुलिस कस्टडी में हैं, या उनका अपहरण हो गया है और तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।यह इतना खतरनाक क्यों है?अति-वास्तविक (Realistic): AI द्वारा बनाई गई आवाज़ को असली आवाज़ से अलग पहचानना मानवीय कानों के लिए लगभग असंभव होता है।सोचने का समय न देना: ठग ऐसी स्थिति पैदा करते हैं कि पीड़ित घबराहट में बिना सोचे-समझे तुरंत डिजिटल पेमेंट (UPI या नेट बैंकिंग) के जरिए पैसे भेज देता है।बढ़ते मामले: McAfee की रिपोर्ट और साइबर डेटा के अनुसार, भारत में इस तरह के स्कैम तेजी से बढ़े हैं, जहां लगभग 47% लोगों ने सीधे या अपने करीबियों के माध्यम से इसका सामना किया है।बचाव के महत्वपूर्ण उपाय (सुरक्षा टिप्स)इस खतरनाक ठगी से बचने के लिए इन नियमों का पालन करें:आवाज़ की दूसरी माध्यम से पुष्टि करें: यदि कोई करीबी कॉल पर पैसे मांग रहा है, तो तुरंत पैसे न भेजें।
कॉल काटकर उसके वास्तविक नंबर पर दोबारा फोन करें या किसी अन्य पारिवारिक सदस्य के माध्यम से उसकी स्थिति की पुष्टि करें।पारिवारिक 'सीक्रेट कोड' (Safe Word) तय करें: अपने परिवार के साथ एक ऐसा गुप्त शब्द (Code Word) तय करके रखें जो सिर्फ आप लोग जानते हों। संकट के समय कॉल आने पर सामने वाले से वह कोड पूछें। AI को उस गुप्त कोड की जानकारी नहीं होगी।तकनीकी खामियों पर ध्यान दें: AI आवाज़ों में अक्सर प्राकृतिक रूप से सांस लेने की आवाज़, इंसानी हिचकिचाहट या वाक्यों के बीच स्वाभाविक ठहराव की कमी होती है। ध्यान से सुनें कि कहीं आवाज़ रोबोटिक तो नहीं लग रही।सोशल मीडिया पर सतर्कता: अपनी या अपने बच्चों की साफ़ आवाज़ वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर पूरी तरह 'पब्लिक' रखने से बचें, ताकि अपराधी डेटा न चुरा सकें।आपातकालीन वित्तीय दबाव को पहचानें: याद रखें कि वास्तविक आपात स्थिति में संस्थाएं (जैसे अस्पताल या पुलिस) कभी भी तुरंत किसी अनजान निजी UPI आईडी पर त्वरित डिजिटल ट्रांसफर की मांग नहीं करती हैं।ठगी होने पर क्या करें?यदि आप या आपका कोई परिचित इस धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो तुरंत ये कदम उठाएं:हेल्पलाइन नंबर 1930: तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं ताकि बैंक खाते से कटे पैसे को ब्लॉक कराया जा सके।साइबर पोर्टल: आधिकारिक National Cyber Crime Reporting Portal पर जाकर अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करें।बैंक को सूचित करें: अपने बैंक से तुरंत संपर्क करें और अनधिकृत लेनदेन की रिपोर्ट करें।
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