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गुजरात: चलादर दुग्ध उत्पादक सहकारी मंडली पर लगा गंभीर आरोप, वर्षों से चुनाव नहीं होने का किया दावा
- Photo by : social media
विस्तार
गुजरात: चलादर दुग्ध उत्पादक सहकारी मंडली के संचालन को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मंडली के मंत्री, चेयरमैन और सदस्यों पर पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों के शोषण तथा मंडली के संचालन में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में जारी प्रेस नोट में निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। प्रेस नोट में आरोप लगाया गया है कि मानजी रतनशी पटेल के समर्थकों को पहले से ही मंडली का सदस्य बना दिया गया, जिसके कारण मंडली में नियमानुसार चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं। आरोप है कि कई वर्षों से चुनाव नहीं होने के कारण मंडली के संचालन पर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा मंडली का दूधघर कथित रूप से मंत्री मानजी रतनशी पटेल की निजी जमीन पर बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। प्रेस नोट के अनुसार, जमीन को लेकर कोई किराया समझौता नहीं किया गया और यह व्यवस्था बनास डैरी की नीति के अनुरूप नहीं होने का दावा किया गया है। प्रेस नोट में मंडली के मंत्री पर पशुपालकों, सदस्यों और कथित तौर पर गैर-सदस्यों को करीब 15 लाख रुपये तक ब्याज पर ऋण देने का आरोप भी लगाया गया है। आरोप के अनुसार, ऋण की मूल राशि और ब्याज की वसूली दूध के भुगतान से की जा रही है। वहीं, अजय (अजाभाई) करशनभाई फोक को चेयरमैन बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाने वाले पक्ष का दावा है कि वह मंडली के सदस्य नहीं हैं। इसके अलावा कुछ अन्य लोगों के नाम भी कथित रूप से सदस्य के तौर पर दर्ज किए जाने की बात कही गई है। प्रेस नोट में मंत्री पर अपने समर्थकों और करीबी लोगों को कथित रूप से मुफ्त दूध देने तथा मासिक रकम या किस्त देने के आरोप भी लगाए गए हैं। साथ ही मंत्री की संपत्ति, खेत में बने बंगले और करीब 50 लाख रुपये की लागत से कथित रूप से बनाए गए तबेले को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सबसे गंभीर आरोप मंडली में लंबे समय से चुनाव नहीं होने को लेकर लगाए गए हैं। प्रेस नोट में दावा किया गया है कि विभिन्न लोगों को कथित रूप से मासिक रकम या प्रतिशत के आधार पर भुगतान किए जाने के कारण चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं। प्रेस नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि मंडली के सदस्यों और गैर-सदस्यों को सूचना देने को लेकर भी भेदभाव किया जा रहा है। इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए संबंधित विभागों से जांच की मांग की गई है। हालांकि, प्रेस नोट में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों की वास्तविकता संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। प्रेस नोट जारी करने वाले पक्ष ने सहकारी विभाग, रजिस्ट्रार कार्यालय और बनास डैरी प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।